भोपाल। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के कारण LPG ने लोगों का दम निकाल दिया है। 3 दिन से प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की वेटिंग भी 5 से 7 दिन की हो गई है। ऑयल कंपनियों ने 15% गैस ही उपलब्ध होने की बात कही है, जो इमरजेंसी सेवा और घरों के लिए ही उपयोग हो सकेगी। ऐसे में गुरुवार से पूरे प्रदेश में गैस का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल, सेना-पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड स्थित भोजनालय को ही मिलेंगे। हालांकि, खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को लिस्ट देना होगी।
दूसरी ओर होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल सकेंगे। दोनों ही शहरों में मेट्रो का काम चल रहा है, जिसमें वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है।
स्टॉक इतना कि 48 घंटे तैसे-जैसे निकलेंगे
भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में ही डेढ़ हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट हैं। जहां हर रोज 2 से ढाई हजार सिलेंडर उपयोग होते हैं। जिन होटल या रेस्टॉरेंट में स्टॉक है, वहां 48 घंटे ही तैसे-जैसे निकल पाएंगे।
इसके बाद होटल और रेस्टॉरेंट बंद हो जाएंगे। सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट और रेहड़ी वालों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाए, लेकिन सरकार ने सिर्फ इमरजेंसी सेवा के लिए गैस देने की बात कही है।

दावा- घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं, हकीकत-लंबी वेटिंग
जिम्मेदार दावा कर रहे हैं कि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन हकीकत में लंबी वेटिंग है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में लंबी वेटिंग है। भोपाल के 5 नंबर इलाके में इसके लिए भीड़ देखी गई।
टीटी नगर इलाके में तो सिलेंडर के लिए भाग-दौड़ भी हो चुकी है। इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर के संकट के बीच खाद्य विभाग के अधिकारी ने लकड़ी, कंडा, कोयला जैसे पारंपरिक ईंधन जलाने पर जोर दिया है। वहीं भोपाल में भी डीजल भट्ठी का उपयोग करने की बात कही जा रही है।
भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन का कहना है कि सरकार के नए निर्देश आए हैं। इसी हिसाब से सप्लाई व्यवस्था है। अब 25 दिन में ही सिलेंडर के लिए बुकिंग कराई जा सकेगी। सर्वर की दिक्कत आने और लोगों के द्वारा 1-2 सिलेंडर स्टॉक जमा करने की वजह से एजेंसियों के बाहर भीड़ लग रही है।
मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां
प्रदेश में मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां होना हैं। इनमें कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होता है, लेकिन ये 3 दिन से नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में शादियों में भोजन पकाने में दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। भोपाल में 3 हजार आभूषण कारीगर हैं। इन्हें महीने में 9000 हजार सिलेंडर की जरूरत होती है।
दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे
ईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर भोपाल के बाजारों में भी दिख रहा है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू ने बताया कि दालों में तेजी बनी हुई है। हरी मूंग करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 100 रुपए, चना 150 रुपए, मूंग मोगर लगभग 125 रुपए और चना दाल करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल तक तेज बताई जा रही है। वहीं, तूअर दाल के भाव में भी करीब 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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मसालों के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। थोक व्यापारी अनिल कुकरेजा के मुताबिक, मिर्ची लगभग 50 रुपए प्रति किलो और धनिया करीब 40 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। वहीं थोक ड्राई फ्रूट व्यापारी किशोर राजदेव के अनुसार, पिस्ता करीब 250 रुपए प्रति किलो, अंजीर 100 रुपए प्रति किलो, केसर लगभग 20 हजार रुपए प्रति किलो और दाल चीनी करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है।
ईरान के रास्ते आती हैं सामग्री
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री के मुताबिक, पिस्ता, अंजीर, दाल, चीनी सहित कई ड्राई फ्रूट्स ईरान के रास्ते भारत आते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर इनके दामों पर पड़ा है। वहीं, भारत से जाने वाले कुछ उत्पादों के दामों में गिरावट भी देखी जा रही है। खोपरा पाउडर करीब 50 रुपए, मखाने 100 रुपए और हरी इलायची लगभग 200 रुपए प्रति किलो तक सस्ती हुई है।
तेल की कीमतों पर भी असर
खाद्य तेल के ब्रोकर रमाकांत तिवारी एवं खाद्य तेल एवं शकर संगठन के महामंत्री कृष्ण कुमार बांगड़ ने बताया कि खाद्य तेलों के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। सोयाबीन तेल के भाव में करीब 15 दिन में लगभग 14 रुपए प्रति किलो तक की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, मूंगफली तेल के 15 लीटर जार की कीमत करीब 2120 रुपए से बढ़कर 2650 रुपए तक पहुंच गई है। हालांकि, गर्मी के मौसम के कारण सरसों तेल की मांग कम होने से इसके रेट फिलहाल स्थिर हैं।













