ISRO का मास्टर स्ट्रोक BAS : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ISRO ने घोषणा की है कि अब भारत अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करेगा, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन( BAS) रखा जाएगा। मतलब आने वाले समय में चीन, अमेरिका की ही तर्ज पर भारत का अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्पेस में मौजूद होगा। यह अंतरिक्ष स्टेशन अनुसंधान क्षमताओं का विकास करने में पूरी मदद करेगा। इस स्टेशन को विकसित करने का लक्ष्य 2035 में आधारित किया गया है जिसके लिए 2018 तक मॉड्यूल तैयार कर लिया जाएगा।
ISRO की टीम ने बताया है कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा। जहां यह वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण और मानव युक्त अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच का काम करेगा। आने वाले वर्षों में यदि भारत यह काम कर देता है तो भारत उन देश की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास अंतरिक्ष में अपने खुद के स्टेशन है जैसे कि रूस अमेरिका और चीन।
क्या है भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और क्या होंगे इसके लक्ष्य?
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भारत का अपना स्वदेशी स्पेस स्टेशन होगा, जो ISRO द्वारा तैयार किया जाएगा। यह एक ऐसा घर होगा जो स्पेस में तैयार होगा, जहां अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे, रिसर्च कर सकेंगे। नई-नई टेक्नोलॉजी जो स्पेस से जुड़ी है वहां टेस्ट की जाएगी। अर्थात स्पष्ट शब्दों में कहे तो यह भारत का अंतरिक्ष में एक और घर होगा। जब भारत का स्पेस में ऐसा परमानेंट घर तैयार हो जाएगा तब यहां लंबे मिशन का काम शुरू किया जाएगा। माइक्रो ग्रेविटी में वैज्ञानिक प्रयोग किए जाएंगे। यहां से जैविक अनुसंधान, विद्युत और भौतिक विभागों का अध्ययन किया जाएगा। हो सकता है आने वाले समय में यह अंतरिक्ष पर्यटक को विकसित करने में मदद करे।
BAS की संरचना कैसी होगी?
BAS की संरचना को कई मॉड्यूल में विभाजित किया जाएगा।
- बेस मॉडल
- कोर मॉड्यूल
- वैज्ञानिक प्रयोगशाला
- सामान्य कार्य / आवास मॉड्यूल
यह एक ऐसा घर होगा जहां मानव युक्त गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। इस स्टेशन को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि यह 3-4 अंतरिक्ष प्रेमियों को 15 से 20 दिन रहने की सुरक्षित जगह प्रदान कर सके।
भारत के लिए अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन क्यों जरूरी है?
विभिन्न एक्सपेरिमेंट्स के लिए भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन होना बहुत जरूरी है। अंतरिक्ष यात्रियों को एक ऐसा प्लेटफार्म चाहिए जहां वह जाकर लंबे समय तक रह सकें और रिसर्च कर सकें। कई प्रकार की दवाइयों का परीक्षण करने के लिए एक सुरक्षित जगह की आवश्यकता होती है। जब ऐसा घर तैयार हो जाएगा तो वहां से पृथ्वी की निगरानी, संचार आसान हो जाएगा। अपना स्पेस स्टेशन रखने वाले देश काफी गिने-चुने हैं और भारत यदि यह कर दिखाता है तो भारत एक उन्नत देश के क्लब में शामिल हो जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन के अलावा ISRO का 2026 का रोडमैप
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के अलावा ISRO 2026 में कई बड़े प्रोजेक्ट भी पूरे करने वाली है:
गगनयान मिशन: Gaganyan mission भारत का हुमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम है। यह गगनयान 1 और गगनयान 2 जैसे दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा। इस मिशन में vyommitra रोबोट के साथ टेस्ट फ्लाइट ट्राई की जाएगी। गगनयान की सफलता ही BAS की नींव होगी क्योंकि स्पेस स्टेशन पर यही तकनीक इस्तेमाल की जाएगी।
चंद्रयान 4 और चंद्रयान 5: ISRO आगे वाले समय में Chandrayaan से जुड़े नए एक्सपेरिमेंट करने वाला है। अब इस isro चंद्रमा पर उतरने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सैंपल रिटर्न मिशन की दिशा में चंद्रयान-4 लॉन्च करने वाला है। साथ ही ज्यादा एडवांस्ड लैंड रोवर और चांद पर संसाधनों की खोज के लिए चंद्रयान-5 भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।
TDS 01: 2026 के शुरुआती महीनों में ISRO TDS 01 अर्थात टेक्नोलॉजी डेमोंसट्रेशन सैटेलाइट लॉन्च 01 लांच करेगा। यह इलेक्ट्रिक प्रोपोर्शन थ्रेस्टर, क्वांटम कम्युनिकेशन और स्थानीय समय मा।न सिस्टम का परीक्षण करने के काम आएगी
स्पेस डॉकिंग टेक्नोलाॅजी SpaDex: अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने के लिए ISRO सबसे जरूरी टेक्नोलॉजी डॉकिंग पर काम करने वाला है। हालांकि इसरो ने SpaDex मिशन के अंतर्गत 2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में डॉक करने में सफलता हासिल कर ली है और यही तकनीक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे मिशन के लिए न्यू साबित होगी।
नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) :भारत जल्द ही भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के भारी मॉड्यूल को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए NGLV का इस्तेमाल करने वाला है जो पहले से ज्यादा ताकतवर ज्यादा किफायती और रियूज़बल लॉन्च व्हीकल होगा।
कुल मिलाकर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सिर्फ एक परियोजना नहीं होगी बल्कि भारत के स्पेस मिशन को नई उड़ान प्रदान करेगी। भारत यदि आने वाले समय में अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर लेता है तो यह आने वाले कई दशकों तक भारत के अंतरिक्ष यात्रियों को विभिन्न अभियानों और अनुसंधानों में मदद प्रदान करेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत का सपना जल्द से जल्द पूरा हो जाएगा।
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