युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM: मणिपुर की राजनीति में जब कभी आग लग जाती है तब ऐसे नेता की तलाश होती है जो पेट्रोल नहीं बल्कि पानी लेकर आए। आज युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM बनकर ऐसे ही एक सहारे के रूप में मणिपुर की राजनीति में उभरे हैं। बिना शोर, बिना नारेबाजी और बिना आक्रामक भाषणों के सालों तक लो-प्रोफाइल रहकर काम करने वाले इस नेता को अचानक से BJP ने मणिपुर की कमान सौंप दी है।
यह कोई इत्तेफाक की बात नहीं है, बल्कि एक सोची समझी रणनीति का फैसला है। जिस राज्य में आए दिन जातीय-हिंसा, अविश्वास और प्रशासनिक ठहराव होते हैं, वहां एक फायरब्रांड नेता की जगह संतुलित नेता को CM बनाया गया है। यह रणनीति नहीं तो और क्या होगा? अब सवाल यह उठता है कि आखिर कौन है युमनाम खेमचंद सिंह? उनके कौन से अनसुने सच है जो उन्हें अलग बनाते हैं? क्या वह सच में युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM बनकर मणिपुर को इस मुश्किल दौर से बाहर निकाल पाएंगे?
कौन है मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह?
युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM चुने गए हैं। 3 फरवरी 2026 को भाजपा ने सर्वसम्मति से उन्हें अपना नेता चुना और अब वे मणिपुर के मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। लगभग 1 साल से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू था, जिसे हटाकर अब लोकतंत्र की वापसी की जाएगी। युमनाम खेमचंद सिंह अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत मे तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे, लेकिन 2017 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली और मणिपुर विधानसभा में उन्हें भाजपा का अध्यक्ष चुना गया।
मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह के अनसुने तथ्य
नेता से पहले हैं खिलाड़ी: बहुत कम लोग यह जानते हैं कि युमनाम खेमचंद सिंह राजनीति में आने से पहले मार्शल आर्ट के खिलाड़ी थे। वह केवल शौकिया तौर पर नहीं खेलते थे, बल्कि वह प्रोफेशनल ताइक्वांडो प्रैक्टिशनर रहे हैं। इसीलिए वह आज भी अनुशासन और आत्म नियंत्रण में माहिर है।
ऐसे राजनेता जो है ब्लैक बेल्ट: युमनाम खेमचंद सिंह को 5th DAN ब्लैक बेल्ट का खिताब मिल चुका है। देश के चुनिंदा राजनेताओं में से युमनाम खेमचंद सिंह एक है जो ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके हैं।
तृणमूल छोड़कर बीजेपी की जॉइन: युमनाम खेमचंद सिंह की सबसे खास बात यह है कि वह आदर्शो के साथ कभी भी समझौता नहीं करते। उन्होंने 2012 में तृणमूल कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था, परंतु वैचारिक मतभेदों की वजह से उन्होंने 2017 में बीजेपी ज्वाइन कर ली। ऐसे कम ही नेता रहे हैं जो पार्टी से असहमति जताकर जनता के हित में सोचते हैं।
भाजपा विधायकों से भी हुई तकरार: 2017 में जब युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर विधानसभा का स्पीकर बनाया गया, तब उन्होंने कई बार विधानसभा में भाजपा विधायकों को टोका। इसीलिए उन्हें विधानसभा में ‘सबसे सख्त’ नेता कह कर पुकारा जाता है। हालांकि संविधान विशेषज्ञ उनके फैसलों की तारीफ करते हैं।
मीडिया से दूर रहकर काम किया: युमनाम खेमचंद सिंह का नाम शायद ही कोई जानता होगा, क्योंकि वह यह ऐसे नेता है ही नहीं जो मीडिया में रोज दिखे। उन्होंने जानबूझकर लो-प्रोफाइल पॉलिटिक्स मेंटेन की है ताकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ना पहचाना जाए बल्कि लोगों के बीच दिखाई दे।
सोशल मीडिया से दूरी: आजकल जहां बाकी नेता सोशल मीडिया पर अपना प्रमोशन करते हैं वही युमनाम खेमचंद सिंह सोशल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। वह न ट्वीट करते हैं ना पॉलिटिकल रील बनाते हैं। उनका मानना है कि ग्राउंड पर पॉलिटिक्स करनी चाहिए लोगों के बीच रहकर काम करना चाहिए।
प्रदेश में क्राइसिस मैनेजर के नाम से मशहूर: युमनाम खेमचंद सिंह को पार्टी एक ऐसे नेता के रूप में देखती है जो शोर नहीं करता लेकिन स्थिर संवाद सुनता है और संकट के समय सही निर्णय लेता है। इसीलिए प्रदेश में उन्हें क्राइसिस मैनेजर कहा जाता है। वे धार्मिक और जातीय भावनाओं को नहीं भड़काते। मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में उनका यह रवैया ही उन्हें सबसे अलग बनाता है।
CM पद के प्रबल दावेदार ना होकर भी बन गए युमनाम खेमचंद मणिपुर CM
युमनाम खेमचंद सिंह का CM बनना भी किसी चमत्कार से कम नहीं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम टॉप 3 में भी नहीं था। मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार में टॉप 3 में थोंगम विश्वजीत सिंह, सत्यव्रत सिंह और गोविंद दास कोंथौजम का नाम लिया जा रहा था। परंतु इन तीनों नामों पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई। पार्टी को कोई भी सेफ ऑप्शन नहीं लगा। तब बीजेपी ने लो-प्रोफाइल, विवाद मुक्त, आत्मविश्वास से भरपूर तथा क्राइसिस टाइम लीडर के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM के लिए चुना।
मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह के आगे का सफर और रणनीति
3 फरवरी 2026 को भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर का मुख्यमंत्री चुन लिया और अब जल्द ही मणिपुर में लोकतांत्रिक शासन की वापसी होगी। मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह की स्थिरता काफी काम आएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो वे संतुलित नेतृत्व और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वह विभिन्न समुदायों के बीच पुल बनने का प्रयास करेंगे और मणिपुर में शांति और विकास कायम कर सकेंगे।
कुल मिलाकर 1 साल के लंबे राष्ट्रपति शासन के बाद आखिरकार मणिपुर में लोकतंत्र की वापसी होने वाली है। जनता को युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर CM के रूप में मिल चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम सिंह का शपथ ग्रहण समारोह 4 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। हालांकि सरकारी तौर पर शपथ की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है, परंतु राजनीतिक कवरेज के मुताबिक मणिपुर मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण कार्यक्रम 4 फरवरी 2026 को होगा।
Read More: लोकसभा में हंगामा: 8 विपक्षी सांसद सस्पेंड, राहुल गांधी–नरवणे विवाद से गरमाई संसद












