भारत ने मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी में एनर्जी सप्लाई और समुद्री स्थिरता पर इसके असर पर गहरी चिंता जताई है। साथ ही, ईरान और यूनाइटेड अरब अमीरात UAE समेत BRICS देशों से अभूतपूर्व जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता, साथ ही "एकतरफा दबाव वा...

BRICS सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को लेकर और भी कई अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव सिर्फ ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मानवीय स्थिति और वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
जयशंकर ने गाजा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वहां का संघर्ष “grave humanitarian implications” पैदा कर रहा है। उन्होंने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने फिलिस्तीन मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए Two-State Solution का समर्थन भी किया।
इसके अलावा भारत ने आतंकवाद पर भी सख्त संदेश दिया। बिना किसी देश का नाम लिए जयशंकर ने कहा कि cross-border terrorism अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और आतंकवाद के खिलाफ “Zero Tolerance” पूरी दुनिया के लिए समान मानक होना चाहिए।
उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया जैसे देशों की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि इन संकटों को हल करने के लिए sustained diplomatic engagement जरूरी है।
BRICS देशों को संबोधित करते हुए जयशंकर ने “unilateral coercive sanctions” यानी एकतरफा प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंध विकासशील देशों को असमान रूप से प्रभावित करते हैं और बातचीत की जगह दबाव नहीं ले सकता।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच multilateral system कमजोर पड़ रहा है और Security Council reform में लगातार देरी अब दुनिया के लिए महंगी साबित हो सकती है।
भारत ने साफ किया कि वह तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की हर रचनात्मक कोशिश में योगदान देने के लिए तैयार है।