दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर: भारतीय टेलीविजन का वह दौर जब स्क्रीन पर सादगी थी शब्दों में गरिमा थी और आवाज में भरोसा था। वह दौर आज भी लोगों के दिलों में याद बनकर ताजा है। 70 और 80 के दशक में दूरदर्शन पर समाचार सिर्फ खबरें नहीं होते थे बल्कि समाचार पढ़ने वाले की आत्मविश्वास का परिचय भी होते थे।
उस दौर के दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर जैसे सलमा सुल्तान, शम्मी नारंग, सरला माहेश्वरी और अविनाश कौर सरीन ने ना केवल समाचार पढ़े बल्की पत्रकारिता के नए मापदंड भी तय किये। दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर्स की आवाज, उनका उच्चारण, उनका व्यक्तित्व, उनका समाचार को प्रस्तुत करने का ढंग सबको प्रभावित करता था। उस समय न तेज तर्रार और ग्लैमरस न्यूज़ स्टूडियो होते थे और ना ही ब्रेकिंग न्यूज़ का हो-हल्ला। शांति, संयम और भाषा की शुद्धता की उस समय की पहचान थी।
दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर जो थे पत्रकारिता की मिसाल
आज जब सरला माहेश्वरी के निधन की खबर आई तो मानो दूरदर्शन के स्वर्णिम युग की एक और मधुर आवाज खामोश हो गई। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं है। बल्कि दूरदर्शन के उस स्वर्णिम युग की यादों को झकझोर देने वाला पल है। वह ऐसी पत्रकारिता का नेतृत्व करती थी जब संयम भाषा और सादगी को महत्व दिया जाता था। दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर ने साबित किया की खबरें शोर से नहीं विश्वास से पढ़ी जाती हैं। आईए जानते हैं दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर के बारे में जिनकी मौजूदगी ने हिंदी समाचार को एक नई ऊंचाई दी।
वे 4 आइकॉनिक हिंदी एंकर्स जिनकी आवाज़ आज भी गूंजती है।
सलमा सुल्तान :जब भी दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर की बात होती है तब सलमा सुल्तान का नाम सबसे पहले आता है। बालों में सजा गुलाब और उनकी संतुलित आवाज उनकी पहचान बन चुकी थी। वे 1967 में दूरदर्शन से जुड़ी और लगभग तीन दशकों तक समाचार पढा। उनकी प्रस्तुति में कोई नाटकीयपन नहीं था। वे ना अनावश्यक बोलती, ना अनावश्यक भाव देती। केवल स्पष्ट उच्चारण और खबरों की गंभीरता। सलमा सुल्तानी वह थी जिन्होंने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या की खबर सुनाई थी। उनकी खबर ही उनकी विश्वसनीयता थी । इसलिए आज भी न्यूज़ जगत में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
सरला माहेश्वरी: सरला माहेश्वरी भी दूरदर्शन के उन आइकॉनिक हिंदी एंकर में शामिल हैं, जिन्होंने हिंदी समाचार को गरिमा दी। उनकी प्रस्तुति में आत्मविश्वास था। वह बेहद ही सुंदर और संतुलित लगती थी। हालांकि उस समय टेलीप्रोम्पटर जैसी सुविधाएं सीमित रूप से मौजूद थी पर फिर भी सरला महेश्वरी अपनी आवाज, शुद्ध उच्चारण और गरिमा में प्रस्तुति से अपनी पहचान बना चुकी थी। उन्होंने 1980-1990 के दशक में दूरदर्शन पर न्यूज़ रीडर का काम किया।
दुखद बात यह है की सरला माहेश्वरी 12 फरवरी 2026 को इस दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह चुकी हैं। दूरदर्शन परिवार ने उन्हें सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका के रूप में आज याद किया है। उनके निधन को मीडिया जगत में टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम युग का अंत बताया जा रहा है। सरला माहेश्वरी के निधन के साथ ही दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर में से एक सितारा कम हो गया।
शम्मी नारंग : शम्मी नारंग उन आईकॉनिक हिंदी एंकर्स में से हैं जिनकी आवाज, स्पष्टता दूरदर्शन की पहचान हुआ करते थे। उनका प्रभाव ही उनकी खबरों की विश्वसनीयता थी। वह केवल समाचार पढ़ते नहीं थे बल्कि उन्हें समझा कर सुनाते थे। शम्मी नारंग की आवाज ने दूरदर्शन के समाचारों को एक विश्वसनीय रूप दिया। और इसी की वजह से दर्शकों के दिलों में हमेशा उनकी एक विशिष्ट जगह रही। खास कर उनका समाचार को समझाना और उच्चारण की स्पष्टता जिसकी वजह से न्यूज़ जगत में आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
अविनाश कौर सरीन: अविनाश कौर सरीन भी दूरदर्शन के लोकप्रिय आवाज़ों में से एक रही हैं। वह नई पीढ़ी की मजबूत आवाज थी। उनकी आवाज में आधुनिकता और परंपरा का संतुलन था। कठिन से कठिन खबर को भी वह इतनी आसानी से प्रस्तुत करती थी कि दर्शकों को उनसे जुड़ाव महसूस होने लगता था। अविनाश कौर सरीन ने दिखाया कि एक एंकर का व्यक्तित्व और भाषा महत्वपूर्ण होते हैं। वे इस उस दौर में न्यूज़ का प्रतिनिधित्वन करती थी पत्रकारिता में गंभीरता को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था।
सलमा सुल्तान, शम्मी नारंग, सरला माहेश्वरी, अविनाश कौर सरीन जैसे दूरदर्शन के आईकॉनिक हिंदी एंकर्स ने भारतीय टेलीविजन को सिर्फ खबर नहीं बल्कि गरिमा का पर्याय बनाया। सरला माहेश्वरी के निधन का समाचार इस युग के अंत का संकेत है लेकिन उनकी आवाज आज भी लोगों की यादों में जीवित है।
Read More: जाह्नवी कांडूला मामला: छात्रा की मौत पर अमेरिका ने किया 262 करोड़ का समझौता, क्या यह न्याय है??










