Delhi GB Road: दिल्ली एक ऐसा शहर है जो सिर्फ सत्ता और गलियारों के लिए नहीं बल्कि अपने कई इलाकों के लिए भी जाना जाता है। राजधानी दिल्ली के 10 जनपथ रोड, कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, लाजपत नगर जैसे रोड जहां सुर्खियां बटोरते हैं वही एक रास्ता ऐसा भी है जहां आते ही बातचीत की आवाज धीमी हो जाती है। हम बात कर रहे हैं GB रोड दिल्ली। जी हां, जीबी रोड दिल्ली रेड लाइट इलाका जिसकी सच्चाई सभी को पता है। जिसे समाज दिन में नकारता है और रात में तलाशता है। लेकिन इसकी हकीकत रेड लाइट एरिया से भी ज्यादा है। ज्यादा गहरी, ज्यादा कड़वी और ज्यादा अनकम्फर्टेबल कर देने वाली।
GB रोड दिल्ली रेड लाइट एरिया, जहां कदम रखते ही बदल जाती है हवा
जीबी रोड दिल्ली का वही रास्ता है जहां कदम रखते ही माहौल एकदम बदल जाता है। संकरी गलियों के बाहर दरवाजे और बालकनियों के पास लड़कियां, महिलाएं, अधेड़ उम्र की औरतें खड़ी दिखती है। किसी की आंखों में थकान है, किसी के चेहरे पर बनावटी मुस्कान। कुछ अपने क्लीवेज दिखाकर, अपने रिवीलिंग पहनावे से ध्यान खींचने की कोशिश करती हैं। तो कुछ हल्के इशारों से आने-जाने वालों को रोकती हैं।
यहां हर चेहरा किसी न किसी की तलाश कर रहा है। हर एक महिला को एक ग्राहक की तलाश है कि जिससे आज रात उसका गुजारा हो जाए। यहां जिस्म बेचना किसी के लिए यह मजबूरी है, तो किसी के लिए जिंदा रहने कीमत। और कई महिलाएं तो अब हालात से समझौता कर बैठी है। क्योंकि यहां ना का मतलब आज ज़ेब खाली रह जाएगी और हां का मतलब आज रोटी का बंदोबस्त हो गया है।
दिल्ली का यह दलदल जहां सत्ता भी चुप हो जाती है
जीबी रोड दिल्ली का केवल रेड लाइट एरिया ही नहीं है यहां गरीबी, मानव तस्करी, कानून की कमजोर पकड़ और सत्ता की खुली छूट देखने को मिलती है। यहां आकर समाज का दोहरा चरित्र दिखाई देता है। अब सवाल यह नहीं उठता की जीबी रोड आज भी क्यों मौजूद है? सवाल यह उठता है कि यह इतने समय से यहां टीका कैसे है? कैसे यहां मजबूर औरतें देह के व्यापार के लिए लाई जाती हैं? कैसे इन सेक्स वर्कर्स के जिस्म के आगे किसी की आत्मा नही पसीज़ती। जीबी रोड इसलिए भी असहज करता है क्योंकि यह हमारे समाज का आईना है। ऐसा आईना जिसमें समाज खुद को देखना ही नहीं चाहता।
जीबी रोड दिल्ली का केवल एक इलाका नहीं बल्कि पूरा सिस्टम है। जीबी रोड जिसका असली नाम गारस्तीन बास्टिन रोड है। यह दिल्ली के मध्य सबसे पुराने इलाकों में से एक है। यहां रेलवे स्टेशन है, थोक बाजार है, पुराने व्यावसायिक केंद्र भी है। परंतु जीबी रोड एक पूरे नेटवर्क से जुड़ा है। दलाल, कोठा संचालक, स्थानीय गुंडे, भ्रष्ट्र अधिकारी और यहां आने वाले अमीर ग्राहक।
जीबी रोड से जुड़े कनेक्शन जो अक्सर दबाए जाते हैं
जीबी रोड के कनेक्शन केवल दिल्ली के आसपास नहीं है बल्कि यहां होती है मानव तस्करी। यहां बिहार, बंगाल, नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों से लाचार लड़कियां और बच्चियां लाई जाती हैं। कुछ समय पहले यहां पहचान बदलने के रैकेट भी उजागर हुए हैं। आंकड़े तो यहां तक कहते हैं कि यहां नाबालिक बच्चियों को भी देह व्यापार के धंधे में धकेला जाता है। हालांकि आते यहां बड़े-बड़े राजनेता और सेलिब्रिटी भी हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से किसी का जुर्म साबित नहीं हुआ। दिल्ली के जीबी रोड की सच्चाई यह भी है कि यहां प्रभावशाली ग्राहक आते हैं जिसकी वजह से यहां केस दब जाते हैं।
जीबी रोड दिल्ली -बॉलीवुड का कनेक्शन
जीबी रोड केवल दिल्ली में नहीं बल्कि पूरे भारत भर में मशहूर है। यहां तक की बॉलीवुड में कई कहानियां इस रेड लाइट एरिया से प्रेरित होकर बनी हैं। जैसे की 2001 में चांदनी बार जो की जीबी रोड की सच्चाई को दर्शाती है। 2014 में मानव तस्करी और जबरन व्यापार पर बनी फिल्म ‘लक्ष्मी’। शाम बेनेगल की मूवी ‘मंडी’ यह सारी इस रेड लाइट एरिया को ध्यान में रखकर ही बनाई गई फिल्में है।
जीबी रोड रेड लाइट एरिया जहां महिलाएं नाम नहीं नंबर बनकर रह जाती हैं
जीबी रोड रेड लाइट एरिया में काम करने वाली ज्यादातर महिलाएं कम पढ़ी-लिखी, आर्थिक रूप से कमजोर और धोखे से लाई गई महिलाएं हैं। यहां उनकी पहचान उनके नाम से नहीं बल्कि कमरे के नंबर से होती है। कई महिलाओं को तो उनके लिए गए चार्ज से पहचाना जाता है। जीबी रोड की महिलाओं का कहना है कि जब दुनिया उनके लिए बाहर के दरवाजे बंद कर देती है तब यही रोड उनके लिए ठिकाना बन जाता है। जीबी रोड में रहने वाली कुछ महिलाओं ने तो अपनी इसे अपनी नियति ही स्वीकार कर लिया है। इनमें से कुछ तो आज ल जीबी रोड की बड़ी ठेकेदार बनकर दूसरी बच्चियों को भी दलदल में घसीट रही हैं।
दिल्ली के जीबी रोड की घिनौनी सच्चाई
भारत में देह व्यापार पर कानून सख्त भले हों, लेकिन इस पर अमल काफी कमजोर है। प्रीवेंशन एक्ट होने के बावजूद भी यहां दलाली चलती रहती है। तस्करी रुकती नहीं और पीढी दर पीढ़ी बच्चियां यहां सेक्स वर्कर बनी रह जाती हैं।
जीबी रोड हमारे समाज का दोहरा चेहरा उजागर करता है। जीबी रोड को खत्म करने की बात आसान है लेकिन इस काम में काफी ईमानदारी लगेगी। ईमानदारी उनके पुनर्वास की, ईमानदारी की इन महिलाओं को समाज फिर से स्वीकार कर लेगा। और जब बात आती है ईमानदारी की तो हमारा समाज सामूहिक चुप्पी ओढ़ लेता है।












