Agriculture

किसानों की बड़ी मांग: गेहूं-धान का समर्थन मूल्य 4000/क्विंटल, और सोयाबीन 6000

किसानों की बड़ी मांग: गेहूं-धान का समर्थन मूल्य 4000/क्विंटल, और सोयाबीन 6000

देश के किसान एक बार फिर से MSP रेट को लेकर बड़ा मांग किया है उनका मांग यह है की धान और गेहूं का MSP रेट 4000 प्रति क्विंटल हो साथ ही सोयाबीन  का MSP रेट 6000  हो  किसान इस बात को लेकर सरकार पर दबाव डाल रहे है उनका कहना है की बढ़ गयी डीजल पेट्रोल की रेट पर हमारा रेट अभी तक क्यों नहीं बढ़ा और  किसानों का ये कहना है कि मौजूदा MSP उनकी लागत तक भी पूरी नहीं कर पा रहा है| किसान अब  नहीं सहेंगे घाटे का सौदा हमारा मांग  जायज  है इसलिए हमारी मांगे पूरी करो हम इस  रेट से खुश नहीं है हमारी मांगे पूरी करो | 

किसानों का प्रमुख मांगे : 

  • गेहूं और धान MSP : ₹4000 प्रति क्विंटल
  • सोयाबीन का MSP : ₹6000 प्रति क्विंटल

paddy procurement धान खरीद - 2400 रुपये क्विंटल भाव होने के बाद भी पैक्स में धान क्यों नहीं बेच रहे किसान, क्या है वजह? - farmers of ramgarh jharkhand selling paddy at

किसान :बढ़ गयी महंगाई पर हमारा रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं 

किसानों का कहना है बढ़ गयी डीजल पेट्रोल का रेट जो की इसका सीधा असर हमारा गेहूं और धान उगाने की लागत पर लगने लगा है क्योंकि डीजल बढ़ने से हमारा सिंचाई लागत बढ़ गया और साथ ही इसका असर सीधा फसल को लाने आने में पड़ने लगा है | 

साथ ही उनका कहना है खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतें आसमान छू रही हैं इस लिए हमारा बचत बहुत कम हो पा रहा है | इसी लिए MSP  रेट 4000 प्रति क्विंटल  गेहूं का हो और 6000 प्रति क्विंटल सोयाबीन का हो | इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा है और खेती घाटे का कारन बनती जा रही है।

सोयाबीन किसानों का हो रहा नुकशान 

सोयाबीन किसानों का मांग है की उन्हें मार्केट में उनका फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है उनका कहना है की अंतरराष्ट्रीय बाजार के तुलना में घरेलू दामों में काफी कम मिल रहा है किसानों का कहना है सोयाबीन का दाम ₹6000  प्रति क्विंटल होना चाहिए, हमें कर्ज नहीं, फसल का पूरा दाम चाहिए हमारा मांग जायज है हमारा मांग पूरा करो 

मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों की चुनौती: खराब फसल और गिरते दाम... | The challenge for soybean farmers in Madhya Pradesh: poor harvest and falling prices...

“सोयाबीन का दाम ₹6000 चाहिए, हमें कर्ज नहीं, फसल का पूरा दाम चाहिए!”

ताकि किसानों को उत्पादन लागत से ऊपर दाम मिल सके। और अपना जीवन अच्छा से व्यतीत कर सके और परिवार को अच्छे से पाल सके और उनका घर सही से चल सके | सोयाबीन, जिसे ‘यलो गोल्ड’ कहा जाता है, अगर सही भाव न मिले तो किसान अगली फसल बोने की हिम्मत खो देता है।

किसानों का एक मांग और कानूनी गारंटी  मिलना चाहिए 

किसान संगठनों की एक और बड़ी मांग है कि MSP को कानूनी दर्जा दिया और क़ानूनी गारंटी मिलना चाहिए किसान चाहते है की संसद में ऐसी कानून पास हो जिसके तहत : 

MSP से नीचे फसल खरीदना अपराध माना जाए।

चाहे खरीद सरकार करे या प्राइवेट व्यापारी, MSP बेस प्राइस (Base Price) होना चाहिए।

इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी।

किसानों की सबसे प्रमुख और बुनियादी मांग ‘MSP की कानूनी गारंटी  ही है | 

अक्सर हम सुनते हैं कि सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है। लेकिन किसान फिर भी खुश नहीं हैं। उनका कहना है, “हमें दाम बढ़ाने से ज्यादा, दाम मिलने की गारंटी चाहिए।” और किसानों का कहना है घोषणाओं से पेट नहीं भरता, कानून बनाओ, जो सुरक्षा के काबिल हो

आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होने की संभावना

भारत में किसानों के विरोध का समर्थन क्यों कर रहे हैं वामपंथी? यह एक 'कुलक' आंदोलन है

किसानों का कहना  है की अगर सरकार हमारी मांगे जल्द फैसला नहीं लिया तो यह आंदोलन काफी तेजी से बढ़ सकता है और बताया जा रहा की आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच बातचीत होने की संभावना बताई जा रही है  | और बताया जा रहा है की मस्प के रेट पर कोई जानकारी सामने नहीं आया है 

किसान का नैरा है फसल हमारी, दाम तुम्हारा अब नहीं चलेगा यह बंटवारा!” मांग हमारा जायज है MSP रेट बढ़ाओ | और उनका कहना है की यह भीख नहीं हमारा अधिकार है हमारी मांगे पूरी करो | 

उनका कहना है जब हम बाजार से एक माचिस की डिब्बी भी खरीदते हैं, तो उसका रेट फिक्स होता है। दुकानदार अपनी मर्जी से रेट तय करता है। तो किसान की फसल का रेट तय करने का हक उसे क्यों नहीं?

सरकार को इस विषय पर गंभीर होकर सोचने की जरुरत है ताकि किसान भी खुश रह सके और देश में भी ख़ुशी बनी रहे क्योंकि कहावत है की  समृद्ध किसान ही समृद्ध भारत की नींव रख सकता है। इस लिए किसानों का मांग को गंभीर से सोचना चाहिए सरकार को

और पढ़ें :PMAY-U 2.0 क्या है? जानिए 2024-2029 तक शहरी लोगों को कैसे मिलेगा सस्ता घर

Share post: facebook twitter pinterest whatsapp