एग्जाम सक्सेस टिप्स: सुबह बच्चा ध्यान से पढ़ता है, कॉपी में सब लिखता है, सवालों के जवाब भी सही देता है, लेकिन शाम होते-होते सब भूल जाता है, तो यह साधारण परेशानी नहीं बल्कि यह इशारा है कि बच्चे की याददाश्त कमजोर है। जी हां, आमतौर पर माता-पिता समझते हैं कि बच्चा आलसी है लेकिन यह आलस नहीं बल्कि दिमाग को न मिलने वाले पोषण का नतीजा है। जिस प्रकार हमारे शरीर को पोषण की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हमारे ब्रेन को भी सही पोषण की जरूरत होती है। नहीं तो ब्रेन थक जाता है और थका हुआ ब्रेन लंबे समय तक कुछ भी स्टोर नहीं कर पाता।
आजकल की दिनचर्या, पढ़ाई का दबाव, मोबाइल की आदत, गलत खान-पान, नींद की कमी दिमाग को जल्दी थका देते हैं। इसी वजह से बच्चे सुबह पढ़ा हुआ शाम तक दिमाग में रख नहीं पाते। बल्कि परीक्षा के घबराहट की वजह से भूलने की समस्या और दुगनी हो जाती है। हालांकि सबसे अच्छी बात यह है कि इसका आसान समाधान हम सभी के पास मौजूद है। इस परेशानी का हल निकालने के लिए आपको किसी महंगी दवाई की जरूरत नहीं बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे से ही आप बच्चों की याददाश्त शक्ति को बढ़ा सकते हैं। उनके कॉन्सट्रेशन में वृद्धि कर सकते हैं जिससे कुछ ही दिनों आपको बदलाव दिखाई देगा।
बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे
ब्राह्मी: यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे की याददाश्त तेज हो जाए तो आपको ब्राह्मी का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए। आप चाहें तो ताजा ब्राह्मी के पत्ते बच्चों को खिला सकते हैं। इसके अलावा ब्राह्मी का चूर्ण या सिरप भी बच्चे को दूध के साथ दे सकते हैं। इससे याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती है। तनाव और पैनिक जैसी स्थितियों पर भी कंट्रोल आता है।
शंखपुष्पी: शंखपुष्पी आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा एक जानी-मानी गई औषधि है जो ब्रेन को तेज करती है और बेचैनी को समाप्त करती है। आप शंखपुष्पी का चूर्ण या सिरप बच्चों को गर्म दूध या पानी के साथ दे सकते हैं।
घी-मिश्री का नुस्खा: यह नुस्खा सदियों से भारतीय परंपरा में अपनाया जा रहा है जिसमे रोज सुबह बच्चों को खाली पेट एक चम्मच देशी गाय का घी और एक चुटकी मिश्री मिलाकर दी जाती है। कहा जाता है कि यह दिमाग की नसों को पोषण देता है जिसे भूलने की समस्या समाप्त हो जाती है।
तुलसी-काली मिर्च का उपाय: यदि आपका बच्चा थका हुआ रहता है और ध्यान नहीं लगा पता तो उसे रोजाना 5 तुलसी के पत्ते, 1 काली मिर्च पीसकर सुबह शहद में मिलाकर दें। इससे दिमाग एक्टिव हो जाता है और शारीरिक और मानसिक सुस्ती दूर हो जाती है।
भीगे हुए बादाम: आयुर्वेदिक परंपरा में बादाम को भिगोकर खाना का ब्रेन के लिए काफी लाभकारी कहा गया है। ऐसे में आप रोज रात को 5:00 बादाम भिगोकर सुबह इसका छिलका उतार कर इसे शहद के साथ मिलाकर बच्चों को दे सकते है। आप चाहे तो इसके ऊपर बच्चों को एक गिलास दूध भी दे सकते हैं। यह नुस्खा याददाश्त को तेज करने का बेहद असरदार उपाय है।
याददाश्त बढ़ाने के लिए दिनचर्या में करें कुछ आसान बदलाव
- यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे की याददाश्त तेज हो जाए उसका कॉन्सट्रेशन लेवल बढ़ जाए तो बच्चे की दिनचर्या में योग और प्राणायाम को जोड़ें।
- उनसे रोजाना अनुलोम-विलोम करवाएं, कपालभाति जैसे प्राणायाम दिन में रोज 10 से 15 मिनट करने के लिए कहें।
- साथ ही पढ़ाई के बीच-बीच में थकान मिटाने के लिए उन्हें वज्रासन में बैठने के लिए प्रेरित करें इससे मानसिक शांति मिलती है।
- इसके अलावा आप बच्चों के दिमाग को तेज बनाने के लिए उनकी दिनचर्या में हेल्दी फूड शामिल करें जैसे कि बादाम,अखरोट, काजू जैसे ड्राई फ्रूट।
- उन्हें दूध-दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स भी जरूर खिलाएं।
- उनकी थाली में हर तरह की सब्जी शामिल करें।
- साथ ही फल खाने की आदत डालें।
- आप चाहें तो बच्चे को रोजाना खाना खाने के बाद गुड़ भी खिला सकते हैं जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और मानसिक थकान नहीं होती।
बच्चों की याददाश्त को तेज करने में माता-पिता का रोल
- बच्चों की याददाश्त तेज करना केवल बच्चों का ही काम नहीं इसमें माता-पिता का भी बहुत बड़ा हाथ होता है।
- ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट स्टडी की रणनीति अपनाएं।
- उन्हें पढ़ाई के लिए फोर्स ना करें बल्कि रिवीजन करने के लिए प्रेरित करें।
- बच्चों में लिखकर याद करने की आदत डालें।
- क्विक रिवीजन के लिए उनसे शॉर्ट नोट्स बनवाएं।
- सबसे खास बात उनकी रोजाना की दिनचर्या पर नजर रखें।
- कम से कम 8 घंटे की नींद सुनिश्चित करें।
- पढ़ाई में बीच-बीच में ब्रेक लेने दे और डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं।
परीक्षा के दिन नजदीक आते ही घबराने की बजाय यदि सही रणनीति अपनाई जाए तो बच्चों की याददाश्त में सुधार होता है। वही जब आयुर्वेद का साथ हो और हेल्दी हैबिट्स अपनाई जाएं तो निश्चित ही बच्चों की याददाश्त तेज होती है और उनका कॉन्सट्रेशन लेवल भी बढ़ता है। इससे बच्चे तो सफल होते ही है उनका आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है। माता पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि एक स्वस्थ शरीर में ही तेज दिमाग बसता है।
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