अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना हर साल हजारों भारतीय छात्र देखते हैं। बेहतर शिक्षा, शानदार करियर और दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी का मौका, यही वजह है कि अमेरिका आज भी भारतीय छात्रों की पहली पसंद बना हुआ है। लेकिन अब एक प्रस्तावित बदलाव ने छात्रों और प्रोफेशनल्स दोनों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सरकार F-1 Student Visa से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में रुककर नौकरी करना पहले जितना आसान नहीं रह सकता। खासकर भारतीय छात्रों के लिए इसका असर काफी बड़ा हो सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई के बाद OPT और H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में अपना करियर बनाते हैं।
क्या है US Student Visa Rules 2026 का प्रस्ताव?
फिलहाल अमेरिका में F-1 वीजा पर पढ़ने वाले छात्रों को “Duration of Status” यानी D/S सुविधा मिलती है। इसका मतलब यह है कि जब तक छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं और वीजा नियमों का पालन करते हैं, तब तक वे अमेरिका में रह सकते हैं। नए प्रस्ताव के तहत यह व्यवस्था खत्म की जा सकती है। इसके बदले छात्रों को अधिकतम चार साल की निश्चित अवधि के लिए अनुमति मिलेगी। यदि किसी छात्र को इससे अधिक समय तक अमेरिका में रहना है, चाहे पढ़ाई के लिए या नौकरी से जुड़े किसी कार्यक्रम के लिए, तो उसे अलग से मंजूरी लेनी होगी। यही बदलाव अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ सकता है?

भारत अमेरिका में पढ़ने वाले सबसे बड़े छात्र समुदायों में से एक है। हर साल हजारों भारतीय छात्र STEM Courses, Artificial Intelligence, Data Science, Software Engineering और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में दाखिला लेते हैं पढ़ाई पूरी होने के बाद अधिकांश छात्र Optional Practical Training (OPT) के जरिए अमेरिका में नौकरी शुरू करते हैं। इसके बाद वे H-1B वर्क वीजा हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन H-1B वीजा लॉटरी आधारित सिस्टम पर चलता है और हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार चयन से बाहर रह जाते हैं। ऐसे में कई छात्र “Day 1 CPT” जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करके अमेरिका में वैध रूप से काम जारी रखते हैं। यदि नया नियम लागू होता है तो यह रास्ता भी काफी सीमित हो सकता है।
OPT और CPT पर क्या पड़ेगा असर?
- अभी तक विश्वविद्यालयों के माध्यम से OPT और CPT से जुड़े कई काम अपेक्षाकृत आसान होते थे। छात्रों को काफी लचीलापन मिलता था और कई प्रक्रियाएं शैक्षणिक संस्थानों के स्तर पर पूरी हो जाती थीं।
- नए नियम लागू होने के बाद छात्रों को सीधे इमिग्रेशन एजेंसियों के साथ अधिक औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।
- इसका मतलब है ज्यादा दस्तावेज, ज्यादा मंजूरी और संभावित देरी। ऐसे में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी शुरू करने की योजना बनाने वाले छात्रों के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
H-1B वीजा नहीं मिला तो क्या होगा?
- कई भारतीय छात्र अमेरिका में नौकरी मिलने के बावजूद H-1B लॉटरी में चयन नहीं होने के कारण परेशान रहते हैं।
- अब तक Day 1 CPT जैसे विकल्प उन्हें अमेरिका में बने रहने का मौका देते थे। लेकिन प्रस्तावित नियमों के बाद यह विकल्प भी सीमित हो सकता है।
- इसका सबसे ज्यादा असर AI, Machine Learning, Data Science और Software Development जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय युवाओं पर पड़ सकता है, जो वर्षों से अमेरिका में अपना करियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिकी कंपनियों को भी हो सकता है नुकसान

- यह मुद्दा सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं पर निर्भर रही हैं।
- Artificial Intelligence और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में विदेशी विशेषज्ञों की बड़ी भूमिका है। यदि कुशल छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका में रुकना कठिन हो जाता है, तो कंपनियों को योग्य उम्मीदवारों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
- कई कंपनियां पहले से ही AI Talent Shortage की चुनौती से जूझ रही हैं। ऐसे में सख्त वीजा नियम उनके लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।
छात्रों को अभी क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को केवल H-1B वीजा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।जो छात्र अमेरिका में पढ़ाई की योजना बना रहे हैं या पहले से वहां मौजूद हैं, उन्हें वैकल्पिक इमिग्रेशन विकल्पों की जानकारी रखनी चाहिए। साथ ही करियर प्लानिंग और वीजा रणनीति पर पहले से काम करना जरूरी होगा। क्योंकि इमिग्रेशन नियम बदलते रहते हैं और केवल एक विकल्प पर भरोसा करना भविष्य में जोखिम भरा साबित हो सकता है।
US Student Visa Rules 2026 से जुड़े प्रस्तावित बदलाव अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुए हैं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच चर्चा जरूर तेज कर दी है। खासकर भारतीय छात्रों के लिए यह बदलाव पढ़ाई के बाद अमेरिका में करियर बनाने के रास्ते को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है।



