Rupali Ganguly AI Deepfake Case: अनुपमा फेम रुपाली गांगुली ने अश्लील AI डीपफेक, मॉर्फ्ड वीडियो और तस्वीरों के कथित गलत इस्तेमाल के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री रुपाली गांगुली एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया शो या किरदार नहीं, बल्कि उनकी डिजिटल पहचान का कथित गलत इस्तेमाल है। अनुपमा फेम एक्ट्रेस ने AI से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरों, मॉर्फ्ड वीडियो और बिना अनुमति उनकी पहचान का इस्तेमाल करने वाले ऑनलाइन कंटेंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
रुपाली का आरोप है कि कुछ वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, वीडियो क्लिप और दूसरी पहचान से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल बिना सहमति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उनकी याचिका में AI और इमेज एडिटिंग टूल्स के जरिए तैयार किए गए अश्लील डीपफेक कंटेंट का भी जिक्र किया गया है।
इस मामले की सुनवाई 4 नवंबर 2026 को जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ के सामने होने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत उनकी डिजिटल पहचान और पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को लेकर क्या निर्देश देती है।

रुपाली गांगुली ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल और अज्ञात लोग उनकी तस्वीरों और वीडियो का अनधिकृत इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ मामलों में उनकी पहचान को AI की मदद से ऐसे वीडियो और तस्वीरों में शामिल किया गया है, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर दूसरी महिलाओं के शरीर पर रुपाली का चेहरा लगाकर अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो तैयार किए हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, इस तरह का कंटेंट उनकी गरिमा, निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।
उनकी याचिका में ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने और उनकी पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अदालत से उचित निर्देश देने की मांग की गई है।
रुपाली गांगुली ने अपनी याचिका में अपने लंबे टेलीविजन करियर और दर्शकों के बीच बनी पहचान का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया है कि पिछले करीब 25 वर्षों में कई लोकप्रिय टीवी शोज में काम करके उन्होंने मनोरंजन जगत में एक अलग पहचान बनाई है।
उनके चर्चित धारावाहिकों में कहानी घर घर की, संजीवनी, साराभाई वर्सेज साराभाई और अनुपमा जैसे नाम शामिल हैं।
खास तौर पर मोनिशा साराभाई के किरदार ने उन्हें कॉमेडी की दुनिया में लोकप्रिय बनाया, जबकि अनुपमा के रूप में उन्हें देशभर के दर्शकों का प्यार मिला।
याचिका में अभिनेत्री ने अपने पुरस्कारों और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि लंबे करियर और सार्वजनिक पहचान के कारण उनका नाम, चेहरा और आवाज व्यावसायिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण हैं।
रुपाली गांगुली की याचिका का सबसे अहम हिस्सा उनके Personality Rights यानी व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़ा है।
आसान भाषा में समझें तो किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़ी कुछ खास चीजों पर उसका अधिकार होता है। इसमें उसका नाम, चेहरा, आवाज, तस्वीर, हस्ताक्षर, बोलने का अंदाज और पहचान से जुड़े दूसरे विशिष्ट गुण शामिल हो सकते हैं।
रुपाली ने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार उनके पास होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति या कंपनी उनकी अनुमति के बिना उनकी तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल करके अपने उत्पाद या सेवाओं का प्रचार नहीं कर सकती।
याचिका में पोस्टर, टी-शर्ट, कवर और दूसरे उत्पादों पर उनकी तस्वीरों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल का भी उल्लेख है। इसके अलावा कुछ ऑनलाइन बुटीक और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म द्वारा उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है।
इस मामले में अभिनेत्री ने अदालत से ऐसे कंटेंट को हटाने और उनकी पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
रुपाली गांगुली से पहले अभिनेत्री Samantha Ruth Prabhu भी अपनी डिजिटल पहचान के कथित गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी कदम उठा चुकी हैं।
सामंथा ने भी आरोप लगाया था कि कुछ वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, आवाज और पहचान का इस्तेमाल करके AI से तैयार किए गए वीडियो और मॉर्फ्ड तस्वीरें प्रसारित कर रहे हैं।
उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनके मामले में अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को चिह्नित आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए थे।
दोनों मामलों में एक समान चिंता सामने आती है। AI तकनीक के जरिए किसी मशहूर व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी कंटेंट तैयार करना और उसे इंटरनेट पर फैलाना अब एक गंभीर कानूनी चुनौती बनता जा रहा है।
रुपाली गांगुली की याचिका पर 4 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले को जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ के सामने सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अभिनेत्री ने अदालत से मुख्य रूप से तीन तरह की राहत मांगी है:
उनकी तस्वीरों, वीडियो और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए।
AI से तैयार किए गए अश्लील और आपत्तिजनक डीपफेक कंटेंट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाया जाए।
उनके नाम, आवाज, चेहरे और अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं के गलत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोका जाए।
हालांकि, सुनवाई से पहले अदालत का अंतिम फैसला या किसी विशेष प्लेटफॉर्म के खिलाफ जारी आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कोर्ट ने उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं।
रुपाली गांगुली का मामला केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल दुनिया में किसी की पहचान और निजता की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल भी उठाता है।
आज AI टूल्स की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल करके ऐसा कंटेंट बनाया जा सकता है, जो देखने और सुनने में वास्तविक लगे। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब इन तकनीकों का इस्तेमाल किसी को बदनाम करने, अश्लील सामग्री बनाने या व्यावसायिक फायदा उठाने के लिए किया जाता है।
खासकर महिलाओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को इस तरह के डिजिटल दुरुपयोग का सामना करना पड़ सकता है।
रुपाली की याचिका इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती है कि किसी सेलिब्रिटी का सार्वजनिक जीवन में होना उसकी निजी पहचान पर दूसरों को मनमाना अधिकार नहीं देता।
अब देखना होगा कि बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर किस तरह के निर्देश जारी किए जाते हैं।