माघी गणेश जयंती 2026 : हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय कहा जाता है। जब भी किसी प्रकार का कोई शुभ कार्य आरंभ होता है तो सबसे पहले गणपति बप्पा को आमंत्रित किया जाता है। गणेश जी से ही जुड़ी हुई है माघ माह की चतुर्थी तिथि क्योंकि इसी दिन हुआ था गणपति बप्पा का जन्म। जी हां माघ मास की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का दिव्य अवतरण हुआ था इसीलिए स्थिति का माघ माह की चतुर्थी तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान पूर्वक पूजा करते हैं। इससे उनके जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं। माघी गणेश जयंती को अत्यंत फलदायी माना जाता है क्योंकि इसी दिन माता पार्वती को गणेश जी पुत्र के रूप में प्राप्त हुए थे। वर्ष 2026 में माघी गणेश जयंती 22 जनवरी 2026 गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:29 से दोपहर 1:37 बताया जा रहा है और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:16 से दोपहर 1:00 तक होने वाला है। इस दिन भूलकर भी चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए।
क्यों मनाई जाती है माघी गणेश जयंती
माघ मास की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणपति माता पार्वती के पास अवतरित हुए थे। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक बालक की रचना की, उसमें प्राण डालकर उसे द्वारपाल बनाया। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तब द्वारपाल श्री गणेश ने भगवान शिव को रोका। भगवान शिव गणेश को पहचानते नहीं थे इसीलिए गुस्से में उन्होंने गणेश का शीश काट दिया। तब माता पार्वती बहुत ज्यादा क्रोधित हुई और उनके विलाप के चलते भगवान शिव ने बालक को पुनर्जीवित करने हेतु हाथी का मस्तक लगा दिया। इसीलिए इस बालक को गणेश कहा गया। यह सारी घटना माघ मास की चतुर्थी के दिन ही घटी थी। इसीलिए इस दिन को गणेश भगवान का अवतरण दिवस मनाया जाता है। इसे माघी गणेश जयंती या वरद चतुर्थी भी कहा जाता है।
माघ मास की गणेश चतुर्थी का महत्व
माघ माह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस माह में दान, व्रत, जप, तप करने पर विशेष फल मिलता है। इसी माह की चतुर्थी के दिन गणेश भगवान अवतरित हुए थे। जिसकी वजह से माघ मास की चतुर्थी तिथि का फल अन्य दिनों की तुलना में और बढ़ जाता है। गणेश चतुर्थी को वरद चतुर्थी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की उपासना कर व्यक्ति यदि सच्चे मन से कुछ मांगे तो उसे वह वरदान जरूर मिलता है। यह चतुर्थी माघ मास में आती है और माघ महीने में तिल-गुड़ इत्यादि के दान का अत्यधिक महत्व होता है। इसलिए इस चतुर्थी को तिलकुंद चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश को गुड और तिल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं।
गणेश जयंती पर भगवान गणेश की पूजा विधि
गणेश जयंती के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश को लाल और पीले रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं। उन्हें दूर्वा चढ़ाई जाती है। तिल और गुड़ का भोग लगाया जाता है। गणेश भगवान को उनका पसंदीदा मिष्ठान मोदक लड्डू इत्यादि अर्पित कर इसे प्रसाद के रूप में सभी को बांटा जाता है।
गणेश जयंती पर भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय
मानसिक अशांति से छुटकारा: यदि आप मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं तो इस दिन चंद्रमा के दर्शन ना करें और पूजा में भगवान गणेश को सफेद मोदक और खीर अर्पित करें।
बुद्धि बढ़ाने के उपाय: अपनी बुद्धि में वृद्धि लाने के लिए इस दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा के दूब अर्पित करें और हरे रंग के वस्त्र पहन कर पूजा करें।
धन की रुकावट दूर करने के लिए: यदि आप धन की रुकावट दूर करना चाहते हैं तो इस दिन गणेश भगवान को गुड और तिल के लड्डू चढ़ाएं। पूजा के बाद गरीबों को गुड़ का दान करें और दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं
विवाह में देरी: यदि आपके या किसी अपने के विवाह में बार-बार रुकावट आ रही है तो गणेश जयंती पर भगवान गणेश को लाल फूल और सिंदूर चढ़ाएं इससे शुक्र दोष में राहत मिलती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करने हेतु: यदि आपके घर में लगातार नकारात्मक ऊर्जा या भारीपन महसूस होता है तो पूजा के बाद जोर-जोर से गणेश जी की आरती गायें। कपूर और लौंग का धुआं घर में करें इससे वास्तु दोष दूर हो जाता है।
सर्व सिद्ध उपाय: गणेश जयंती के दिन मनचाहा वरदान पाने के लिए मध्यकाल में भगवान गणेश का पूजन करें और उन्हें 21 मोदक अर्पित करें ऐसा करने से गणेश जयंती पर किया गया संकल्प जल्दी पूरा होता है।
ध्यान रहे इस दिन चंद्र दर्शन भूल कर भी ना करें,अन्यथा चंद्र दोष लगता है और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है। गणेश जयंती बालक गणेश के अवतरण का दिन है और भगवान गणेश विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहे जाते हैं। ऐसे में गणेश जयंती के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा कर अपने जीवन के दुखों को दूर करें और सुख-समृद्धि तथा मंगल की प्राप्ति करें।
Read More:बसंत पंचमी 2026 पूजा उपाय: ज्ञान, बुद्धि और याददाश्त बढ़ाने के लिए बसंत पंचमी पर करें यह अचूक उपाय












