Govardhan Puja 2026 कब है, 9 या 10 नवंबर? जानें गोवर्धन पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, अन्नकूट का महत्व, 56 भोग, पूजा विधि और जरूरी मंत्र।

दीपावली की रौनक के बीच एक और महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस बार Govardhan Puja 2026 की तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी असमंजस है। कोई 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा बता रहा है तो कहीं 10 नवंबर की तारीख सामने आ रही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की पूजा किस दिन करनी चाहिए?
हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर से शुरू होकर 10 नवंबर की दोपहर तक रहेगी। चूंकि 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि की गणना के अनुसार इस साल गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग और तरह-तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, मंत्र, आरती और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
गोवर्धन पूजा की तारीख कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के आधार पर तय की जाती है। साल 2026 में प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 9 नवंबर को हो रही है, लेकिन इसका समापन अगले दिन होगा।
पंचांग के अनुसार तिथि का समय इस प्रकार है:
तो फिर 9 नवंबर को पूजा क्यों बताई जा रही है?
दरअसल, 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। कुछ धर्मशास्त्रीय परंपराओं में अमावस्या से युक्त प्रतिपदा के आधार पर 9 नवंबर को भी पूजा का निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, सामान्य उदया तिथि के अनुसार 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा मौजूद रहने के कारण इसी दिन गोवर्धन पूजा करना उचित माना गया है।
इसलिए पूजा की तारीख तय करते समय केवल तिथि शुरू होने का समय नहीं, बल्कि स्थानीय पंचांग और पूजा की परंपरा भी देखनी चाहिए। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग और अन्य प्रमुख पंचांगों में 10 नवंबर को ही गोवर्धन पूजा की तारीख दी गई है।
10 नवंबर को भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष माना गया है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
नोट: मुहूर्त शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है।
अगर आप इंदौर में पूजा करने वाले हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार 10 नवंबर को सुबह लगभग 6:38 से 8:51 बजे तक का प्रातःकालीन समय उपलब्ध है।
एक जरूरी बात यह भी है कि 10 नवंबर को प्रतिपदा दोपहर 2 बजे समाप्त हो रही है। इसलिए शाम के मुहूर्त को लेकर अलग-अलग वेबसाइटों पर दिए गए समय को बिना स्थानीय पंचांग जांचे अंतिम न मानें।
गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की उस अद्भुत लीला से है, जिसमें उन्होंने अपनी छोटी अंगुली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की थी।
श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में इस प्रसंग का वर्णन मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रजवासी हर साल अच्छी वर्षा और खुशहाली की कामना से देवराज इंद्र की पूजा करते थे। उनका मानना था कि इंद्र देव की कृपा से वर्षा होती है और खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलता है।
लेकिन बालकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उनके जीवन और आजीविका में गोवर्धन पर्वत, जंगल, पेड़-पौधों और गायों का विशेष योगदान है। इसलिए उन्हें प्रकृति और गोवर्धन पर्वत के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।
श्रीकृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की और तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया।
इंद्र देव ने क्यों किया था ब्रज पर प्रहार?
जब देवराज इंद्र को पता चला कि ब्रजवासियों ने उनकी पूजा बंद कर दी है, तो वे क्रोधित हो गए। उन्होंने अपने अहंकार में आकर ब्रज में मूसलाधार बारिश और भयंकर तूफान भेज दिया।
लगातार बारिश से पूरा ब्रज क्षेत्र जलमग्न होने लगा। लोग अपने परिवार और पशुओं की रक्षा के लिए परेशान हो गए। ऐसे में सभी भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे।
भगवान कृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत
अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। उन्होंने सभी ब्रजवासियों, गायों और दूसरे पशुओं को पर्वत के नीचे सुरक्षित आश्रय दिया।
धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने लगातार सात दिनों तक पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाए रखा। आखिरकार इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
इसके बाद सुरभि गाय ने भगवान कृष्ण का दुग्धाभिषेक किया। इसी प्रसंग से भगवान कृष्ण को गोविंद नाम से भी जाना जाता है।
इसी लीला की याद में हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद घर के आंगन या किसी पवित्र स्थान पर गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर पूजा की तैयारी करें।
पूजा की पारंपरिक विधि इस प्रकार है:
1. गोवर्धन पर्वत बनाएं: गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति तैयार करें। इसे फूलों, पत्तियों और रंगोली से सजाएं। गोबर उपलब्ध न होने पर मिट्टी से प्रतीकात्मक आकृति भी बनाई जा सकती है।
2. भगवान कृष्ण का ध्यान करें: गोवर्धन पर्वत के पास भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री अर्पित करें: रोली, अक्षत, चंदन, फूल, माला, धूप और दीप अर्पित करें।
4. भोग लगाएं: भगवान श्रीकृष्ण को खीर, मिठाई, बताशे, कढ़ी-चावल और अन्नकूट के पकवानों का भोग लगाएं।
5. गोवर्धन की परिक्रमा करें: पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत की सात बार परिक्रमा करने की परंपरा है। इस दौरान जल की धारा अर्पित करते हुए भगवान का स्मरण करें।
6. गौ माता की पूजा करें: गायों को स्नान कराएं, तिलक लगाएं और हरा चारा खिलाएं। उनकी उचित देखभाल और सेवा करें।
7. आरती करें: पूजा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
ध्यान रखें कि पूजा की विधि में अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।
गोवर्धन पूजा से पहले सभी जरूरी सामान इकट्ठा कर लेना अच्छा रहता है, ताकि पूजा के समय कोई परेशानी न हो।
पूजा सामग्री की सूची:
गाय का गोबर या मिट्टी
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर
गोवर्धन पर्वत की तस्वीर
रोली और कुमकुम
अक्षत और चावल
गंगाजल या शुद्ध जल
फूल और फूलों की माला
पान और बताशे
मिठाई और खीर
दही और शहद
धूप और दीपक
सरसों का तेल
कलश
केसर और चंदन
नैवेद्य और मौसमी फल
कढ़ी-चावल और अन्नकूट का प्रसाद
गोवर्धन पूजा कथा की पुस्तक
गोवर्धन पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप किया जाता है।
गोवर्धन पूजा का मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। गोवर्धनाय नमः।
ॐ श्री गोवर्धनाय नमः।
गोवर्धन ध्यान मंत्र:
गोवर्धन धराधार गोकुलत्राणकारक।
विष्णुबाहुकृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥
इस मंत्र के माध्यम से भगवान गोवर्धन से गौवंश की रक्षा, परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को अलग-अलग प्रकार के अनाज, सब्जियों, मिठाइयों और पकवानों का भोग लगाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अन्न-धन की कमी नहीं होती।
इस दिन कई मंदिरों और घरों में 56 भोग तैयार करने की परंपरा है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण को उनकी पसंद के विभिन्न सात्विक पकवान अर्पित किए जाते हैं।
अन्नकूट में कौन-कौन से पकवान बनाए जाते हैं?
कढ़ी और चावल
दाल और विभिन्न प्रकार के अनाज
बाजरे और गेहूं से बने पकवान
मौसमी हरी सब्जियां
मिश्रित सब्जी
पूड़ी और रोटी
खीर और हलवा
पेड़ा, लड्डू और अन्य मिठाइयां
फल और सूखे मेवे
अन्नकूट का भोग लगाने के बाद इसे भगवान का प्रसाद मानकर परिवार, रिश्तेदारों और दूसरे श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। कई मंदिरों में इस अवसर पर विशाल भंडारे भी आयोजित किए जाते हैं।
इस परंपरा का एक सुंदर संदेश यह भी है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति की देन है। इसलिए अन्न का सम्मान करना और जरूरतमंद लोगों के साथ भोजन साझा करना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गोवर्धन पूजा केवल भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पशुधन और अन्न के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर भी है।
इस त्योहार के तीन प्रमुख संदेश हैं।
1. प्रकृति का सम्मान: गोवर्धन पर्वत, जंगल, पेड़-पौधे और जल के बिना जीवन संभव नहीं है। यह पर्व हमें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने की सीख देता है।
2. गौ माता की सेवा: ब्रज की संस्कृति में गायों का विशेष महत्व रहा है। इसलिए इस दिन गौ माता की पूजा करने, उन्हें चारा खिलाने और उनकी देखभाल करने की परंपरा है।
3. अहंकार का त्याग: भगवान कृष्ण की गोवर्धन लीला सिखाती है कि शक्ति और पद का अहंकार नहीं करना चाहिए। इंद्र देव को भी अंत में अपनी गलती का एहसास हुआ था।
आज के समय में भी इस त्योहार का संदेश काफी प्रासंगिक है। प्रकृति की रक्षा, पशुओं के प्रति दया और भोजन की बर्बादी रोकना ऐसी बातें हैं जिन्हें हमें केवल त्योहार तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें और सात्विक वातावरण बनाए रखें।
भगवान श्रीकृष्ण को शुद्ध और सात्विक भोजन का भोग लगाएं।
गायों और दूसरे पशुओं को परेशान न करें तथा उनकी जरूरतों का ध्यान रखें।
किसी का अपमान करने, झूठ बोलने और विवाद करने से बचें।
अन्न और भोजन का अपमान न करें।
अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्नदान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
पूजा के दौरान श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
कुछ परिवारों में इस दिन व्रत, ब्रह्मचर्य और खानपान से जुड़े अतिरिक्त नियम भी माने जाते हैं। हालांकि, ये परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं। इन्हें सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य नियम नहीं समझना चाहिए।
गोवर्धन पूजा के दौरान भगवान गोवर्धन महाराज की आरती करने की परंपरा है। इस अवसर पर गाई जाने वाली प्रसिद्ध आरती की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं:
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कंठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल।
तेरी सात कोस की परिकम्मा,
चकलेश्वर है विश्राम।
आरती के बाद भगवान श्रीकृष्ण से परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार हमें भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ प्रकृति, गौवंश और अन्न के महत्व को समझने का अवसर देता है। भगवान कृष्ण की गोवर्धन लीला यह संदेश देती है कि अहंकार से दूर रहकर दूसरों की रक्षा करना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना ही सच्चे धर्म का आधार है।
साल 2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को उदया तिथि के अनुसार मनाई जाएगी। इस दिन सुबह शुभ मुहूर्त में गोवर्धन महाराज की पूजा करें, भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाएं और गौ-सेवा के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि पंचांग एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इनमें अंतर हो सकता है। पूजा करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पुरोहित से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
1. गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। उदया तिथि के अनुसार इस दिन सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा मौजूद रहेगी।
2. गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को क्यों बताई जा रही है?
9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है। कुछ क्षेत्रीय और धर्मशास्त्रीय परंपराओं में तिथि के विशेष संयोग के आधार पर इस दिन भी पूजा का विधान माना जाता है। हालांकि, सामान्य उदया तिथि के अनुसार 10 नवंबर मुख्य पूजा दिवस है।
3. गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
दिल्ली में 10 नवंबर को सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। दूसरे शहरों में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय अलग हो सकता है।
4. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट क्यों कहते हैं?
अन्नकूट का अर्थ अन्न का पर्वत होता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के अनाज, सब्जियों, मिठाइयों और पकवानों का भोग लगाया जाता है।
5. गोवर्धन पूजा में कितनी परिक्रमा की जाती है?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा की जाती है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और प्रार्थना की जाती है।
6. गोवर्धन पूजा में कौन-सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
इस दिन ॐ श्री गोवर्धनाय नमः और गोवर्धन ध्यान मंत्र का जाप किया जाता है।
7. गोवर्धन पूजा में किसकी पूजा होती है?
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की विशेष पूजा की जाती है।
8. गोवर्धन पूजा पर 56 भोग क्यों लगाया जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा है। इसे भक्ति, प्रेम और भगवान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
9. क्या गोवर्धन पूजा के दिन गाय की पूजा करना जरूरी है?
हिंदू परंपरा में गौ-पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन गायों को तिलक लगाते हैं, हरा चारा खिलाते हैं और उनकी सेवा करते हैं।