छठ पूजा 2026 की शुरुआत 13 नवंबर से होगी। जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की तारीख, दिल्ली का समय और चार दिनों की पूजा विधि और नियम जानें।

साल भर जिस महापर्व का इंतजार बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के लाखों परिवार करते हैं, वह छठ पूजा अब कुछ ही दिनों दूर है। घाटों की सफाई, बांस के सूप, दउरा, ठेकुआ की खुशबू और छठी मैया के पारंपरिक गीतों के साथ माहौल भक्तिमय होने वाला है।
लेकिन इस बार कई लोगों के मन में एक सवाल है कि छठ पूजा 2026 आखिर 15 नवंबर को है या 16 नवंबर को? अगर आप भी पूजा की तैयारियां शुरू करने वाले हैं, तो तारीख को लेकर किसी तरह का भ्रम न रखें। साल 2026 में छठ महापर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार को दिया जाएगा, जबकि अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होगा।
आइए जानते हैं छठ पूजा 2026 का पूरा चार दिवसीय कैलेंडर, नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का समय, पूजा सामग्री और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं।
हिंदू पंचांग के अनुसार छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इसे सूर्य षष्ठी, छठ महापर्व और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है।
साल 2026 में मुख्य छठ पूजा 15 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन शाम को व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। हालांकि, पूरा पर्व चार दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत 13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी।
छठ पूजा 2026 की महत्वपूर्ण तारीखें:
इस तरह 15 नवंबर को छठ का मुख्य दिन है, जबकि 16 नवंबर को सुबह का अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाएगा।
छठ पूजा की तारीख के साथ अर्घ्य का समय जानना भी जरूरी है। खासकर उन परिवारों के लिए जो नदी, तालाब या स्थानीय छठ घाट पर पूजा करने जाते हैं।
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 14 नवंबर 2026 की रात लगभग 11:23 बजे शुरू होगी और 16 नवंबर की रात लगभग 2 बजे समाप्त होगी।
छठ पूजा के दो सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य हैं।
नई दिल्ली के अनुसार अर्घ्य का अनुमानित समय:
ध्यान रखें कि ये समय नई दिल्ली के स्थानीय सूर्यास्त और सूर्योदय पर आधारित हैं। पटना, भोपाल, लखनऊ, रांची और अन्य शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग होगा। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार अर्घ्य का समय जरूर देख लें।
छठ पूजा केवल एक दिन का त्योहार नहीं है। इसके चारों दिनों का अपना धार्मिक महत्व है। पहले दिन से ही घरों में साफ-सफाई, सात्विक भोजन और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर की साफ-सफाई करते हैं।
इस दिन पवित्रता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रती आमतौर पर चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी से बना पारंपरिक भोजन ग्रहण करते हैं। इसे कद्दू-भात भी कहा जाता है।
भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई परिवारों में इसके लिए अलग बर्तन और रसोई का इस्तेमाल किया जाता है। खाने में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता।
नहाय-खाय का उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध करके छठ व्रत की शुरुआत करना है।
छठ पूजा का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इसे लोहंडा के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन व्रती सुबह से शाम तक उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद पूजा करने और प्रसाद ग्रहण करने के साथ दिनभर का व्रत पूरा किया जाता है।
खरना के प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ की खीर, रोटी और फल शामिल होते हैं। कई जगहों पर चावल और गुड़ से बनी रसिया खीर भी तैयार की जाती है।
पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों में बांटा जाता है।
खरना के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू करते हैं। इसमें पारंपरिक रूप से भोजन और पानी दोनों का त्याग किया जाता है। यह व्रत अगले दिन शाम के संध्या अर्घ्य से होते हुए चौथे दिन सुबह उषा अर्घ्य तक चलता है।
15 नवंबर को छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इसे संध्या अर्घ्य या डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का दिन कहा जाता है।
इस दिन घरों में ठेकुआ, फल और अन्य पारंपरिक प्रसाद तैयार किए जाते हैं। पूजा की सामग्री बांस के सूप और दउरा में सजाई जाती है।
शाम होते ही व्रती परिवार के सदस्यों के साथ नदी, तालाब या निर्धारित छठ घाट पर पहुंचते हैं। सूर्यास्त के समय पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
अर्घ्य के दौरान सूप में रखे फल, नारियल, गन्ना, ठेकुआ और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान छठी मैया के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
कई परिवारों में इस दिन कोसी भराई की परंपरा भी निभाई जाती है। इसमें गन्ने से विशेष संरचना बनाकर उसके नीचे मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं और पूजा की जाती है।
संध्या अर्घ्य की सबसे खास बात यह है कि इसमें डूबते सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है। यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की एक अनोखी परंपरा है।
16 नवंबर को छठ महापर्व का अंतिम दिन होगा। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले ही व्रती और उनके परिवार के सदस्य घाट पर पहुंच जाते हैं।
उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। इस दौरान सूर्य देव और छठी मैया से परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
उषा अर्घ्य के बाद व्रती पूजा पूरी करके पारण करते हैं। इसके साथ ही लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त होता है।
पारण के बाद ठेकुआ और अन्य प्रसाद परिवार, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और श्रद्धालुओं में बांटे जाते हैं।
छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व है। पूजा से पहले सभी जरूरी चीजें इकट्ठा कर लेना बेहतर रहता है।
छठ पूजा की प्रमुख सामग्री में शामिल हैं:
बांस का सूप और दउरा।
गन्ना।
नारियल।
केला और मौसमी फल।
ठेकुआ।
चावल और गुड़।
गेहूं का आटा।
शुद्ध घी।
दूध।
मिट्टी के दीपक।
रूई और दीपक की बाती।
अगरबत्ती और धूप।
फूल।
पान के पत्ते और सुपारी।
अदरक और हल्दी।
जल से भरा कलश या पात्र।
पूजा सामग्री रखने के लिए साफ कपड़ा।
इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार कुछ अन्य चीजें भी पूजा में शामिल की जाती हैं।
छठ पूजा में प्रसाद का अपना अलग महत्व है। यहां भोजन सिर्फ त्योहार का हिस्सा नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से भी जुड़ा है।
1. ठेकुआ: छठ पूजा का नाम आते ही सबसे पहले ठेकुआ याद आता है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है। आटे को अच्छी तरह गूंथकर पारंपरिक सांचे में आकार दिया जाता है और फिर सुनहरा होने तक तला जाता है।
2. कद्दू-भात: नहाय-खाय के दिन बनने वाला यह पारंपरिक भोजन चावल और कद्दू की सब्जी से तैयार किया जाता है। इसके साथ चने की दाल भी परोसी जाती है।
3. चना घुघनी: काले चने से बनने वाली घुघनी छठ के पारंपरिक पकवानों में शामिल है। इसे हल्के मसालों के साथ तैयार किया जाता है।
4. आलू की सब्जी: बिना प्याज और लहसुन के तैयार की जाने वाली आलू की सब्जी पूरी के साथ परोसी जाती है।
5. टिकरी: चावल के आटे से बनने वाली टिकरी एक पारंपरिक रोटी है। इसे घी या गुड़ के साथ खाया जाता है।
6. पूरी: गेहूं के आटे से तैयार की गई गर्मागर्म पूरी छठ के पारंपरिक भोजन का हिस्सा होती है। इसे आलू की सब्जी और चना घुघनी के साथ परोसा जाता है।
छठ पूजा को भारत के कठिन व्रतों में गिना जाता है। इसमें साफ-सफाई, अनुशासन और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
व्रत के दौरान आमतौर पर इन परंपराओं का पालन किया जाता है:
नहाय-खाय के दिन स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
भोजन और प्रसाद बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
खरना के दिन पूरे दिन उपवास रखा जाता है।
शाम को पूजा के बाद खरना का प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू किया जाता है।
तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
उषा अर्घ्य के बाद पारण करके व्रत पूरा किया जाता है।
परंपरागत रूप से निर्जला व्रत लगभग 36 घंटे का होता है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और समुदायों में व्रत रखने के तरीके में अंतर हो सकता है।
एक जरूरी बात: गर्भवती महिलाओं, नियमित दवाइयां लेने वाले लोगों और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को कठिन निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक प्रमुख हिंदू पर्व है। सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का आधार माना जाता है। वहीं छठी मैया को षष्ठी देवी के रूप में भी पूजा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व में सूर्य देव की उपासना करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संतान के स्वास्थ्य तथा लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।
छठ पूजा की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें डूबते और उगते, दोनों सूर्य की पूजा की जाती है। संध्या अर्घ्य के दौरान अस्त होते सूर्य के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है, जबकि उषा अर्घ्य के दौरान नए दिन और नई ऊर्जा का स्वागत किया जाता है।
यह त्योहार प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भी प्रतीक है।
छठ पूजा की एक और खास बात यह है कि इसमें किसी विशेष मूर्ति की पूजा मुख्य केंद्र नहीं होती। श्रद्धालु सीधे सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और प्राकृतिक जल स्रोतों के किनारे पूजा करते हैं।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में इस पर्व का विशेष महत्व है। हालांकि, अब दिल्ली, मुंबई, भोपाल और देश के कई दूसरे शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा मनाते हैं।
छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह दिवाली के कुछ दिनों बाद आती है।
हिंदू पंचांग चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में छठ पूजा की तारीख हर साल बदलती रहती है।
साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, जबकि छठ पूजा का मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को होगा।
दिवाली के बाद आने वाला यह पर्व खासतौर पर उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिनकी पीढ़ियों से छठ पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
नवंबर का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। दिवाली से लेकर गुरु नानक जयंती तक कई बड़े पर्व इसी महीने पड़ रहे हैं।
नवंबर 2026 के कुछ प्रमुख त्योहार और अवसर इस प्रकार हैं:
स्कूल और सरकारी छुट्टियों को लेकर जरूरी जानकारी: इन तारीखों पर सभी राज्यों में छुट्टी होना जरूरी नहीं है। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों, बैंकों और निजी संस्थानों की छुट्टियां संबंधित राज्य सरकार और संस्थान की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार तय होती हैं।
चूंकि छठ पूजा 15 नवंबर को रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इस दिन पहले से ही सामान्य साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 16 नवंबर को छुट्टी मिलेगी या नहीं, यह स्थानीय सरकारी और स्कूल कैलेंडर पर निर्भर करेगा।
1. छठ पूजा 2026 कब है?
छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय पर्व 13 नवंबर से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। मुख्य संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को दिया जाएगा।
2. नहाय-खाय 2026 किस दिन है?
नहाय-खाय 13 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन से छठ महापर्व की शुरुआत होगी।
3. खरना 2026 कब मनाया जाएगा?
खरना 14 नवंबर 2026, शनिवार को होगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को पूजा करके गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे।
4. क्या छठ पूजा 15 या 16 नवंबर को है?
छठ पूजा का मुख्य दिन 15 नवंबर 2026, रविवार है। इस दिन डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। 16 नवंबर को उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाएगा।
5. छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य कितने बजे होगा?
नई दिल्ली के अनुसार 15 नवंबर को सूर्यास्त शाम लगभग 5:28 बजे होगा। इसी समय संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है।
6. छठ पूजा में उषा अर्घ्य कब दिया जाएगा?
16 नवंबर 2026, सोमवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। नई दिल्ली में सूर्योदय का अनुमानित समय सुबह 6:44 बजे है।
7. छठ पूजा का व्रत कितने घंटे का होता है?
खरना के प्रसाद के बाद शुरू होने वाला पारंपरिक निर्जला व्रत लगभग 36 घंटे तक चलता है। इसका समापन चौथे दिन उषा अर्घ्य के बाद पारण से होता है।
8. छठ पूजा में किसकी पूजा की जाती है?
छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया, जिन्हें षष्ठी देवी भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है। इस दौरान परिवार के स्वास्थ्य, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
9. छठ पूजा में कौन-सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
छठ पूजा में मुख्य रूप से ठेकुआ, नारियल, केला, गन्ना, मौसमी फल और अन्य पारंपरिक पकवानों का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
10. क्या छठ पूजा 16 नवंबर को भी मनाई जाएगी?
हां, 16 नवंबर को छठ पूजा का अंतिम दिन होगा। इस दिन सुबह उषा अर्घ्य दिया जाएगा और उसके बाद पारण करके व्रत समाप्त किया जाएगा।
छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व लोगों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जोड़ता है।
इस साल 13 नवंबर से नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत होगी। 15 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 16 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा।