उर्दू शायरी के जाने-माने और बेहद लोकप्रिय शायर बशीर बद्र उर्दू अदब के सबसे प्रिय शायरों में से एक थे। उनकी शायरी में प्यार, अकेलापन, रिश्तों की नाज़ुकियाँ और ज़िंदगी के गहरे एहसास बहुत खूबसूरती से झलकते हैं। उन्होंने बेहद सरल और सहज शब्दों में गहरी बातें कहने की कला विकसित की, जिसकी वजह से उनकी शायरी हर उम्र के लोगों के दिल को छू जाती थी।

उनकी ग़ज़लें आम लोगों की भावनाओं को सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ बयां करती थीं। बशीर बद्र की रचनाओं में इंसानियत, दर्द, मोहब्बत और उम्मीद का अनोखा मेल देखने को मिलता है, जो उन्हें और भी खास बनाता है।

उनका निधन 28 मई 2026 को 91 वर्ष की उम्र में हुआ।

Bashir Badr की फेमस शायरी

1.“मोहब्बत एक खुशबू है, हमेशा साथ रहती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता।”
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2. “कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।”

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3.“चाँद सा मिसरा अकेला है,
मेरे कागज़ पर उजाला है।”

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4.“तुम मोहब्बत को खेल कहते हो,
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली।”

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5.“कभी यूँ भी आ मेरी आँख में,
कि मेरी नज़र को ख़बर न हो।”

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6. “मैं चुप रहा तो और ग़लतफ़हमियाँ बढ़ीं,
वो भी सुना है उसने जो मैंने कहा नहीं।”

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7. “इश्क़ में कौन बताता है,
किसी को क्या-क्या खोना पड़ता है।”

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8. “वो बड़ा रहीस-ओ-करीम है,
मुझे ये सिफ़त भी अता करे,
तुझे भूलने की दुआ करूँ,
तो मेरी दुआ में असर न हो।”

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9. “कितनी खूबसूरत हो जाती है दुनिया,
जब कोई अपना कहता है — ‘तुम याद आ रहे हो।“

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10. “उसे किसी की मोहब्बत का ऐतबार नहीं,
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है।”

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11. “कुछ रिश्ते किताबों में नहीं मिलते,

वे तो दिल की खामोशियों में पलते हैं।”