
आजकल सोशल मीडिया पर हर दिन हजारों फोटो और वीडियो शेयर किए जाते हैं। इनमें से कुछ असली होते हैं, तो कुछ AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाए जाते हैं। कई बार ये तस्वीरें और वीडियो इतने असली लगते हैं कि पहली नजर में इनके नकली होने का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
AI की मदद से किसी की फोटो बदलना, नकली आवाज बनाना या ऐसा वीडियो तैयार करना संभव है जिसमें कोई व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे, जो उसने कभी कही ही नहीं। ऐसे वीडियो को देखकर लोग कई बार गलत जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं और उसे दूसरों के साथ भी शेयर कर देते हैं।
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी फोटो या वीडियो की सच्चाई का पता कैसे लगाया जाए।
AI से बनी तस्वीरों में कई बार छोटी-छोटी गलतियां रह जाती हैं। जैसे किसी व्यक्ति की उंगलियां असामान्य दिखना, आंखों में अंतर होना, कानों का आकार अजीब लगना या तस्वीर के पीछे की चीजों का सही तरीके से न दिखना।
हालांकि, अब AI पहले से बेहतर तस्वीरें बनाने लगा है, इसलिए सिर्फ इन गलतियों के आधार पर किसी फोटो को नकली नहीं कहा जा सकता। फिर भी तस्वीर को ध्यान से देखना उसकी सच्चाई जांचने का पहला तरीका हो सकता है।
कई बार नकली वीडियो में किसी व्यक्ति का चेहरा तो सही दिखाई देता है, लेकिन उसकी आवाज और होंठों की हरकत में अंतर होता है। वीडियो देखते समय ध्यान दें कि व्यक्ति के बोलने और होंठ हिलने का समय एक जैसा है या नहीं।
आवाज जरूरत से ज्यादा सपाट लगना, बोलने के दौरान अजीब रुकावट आना या चेहरे के भावों का आवाज से मेल न खाना भी जांच करने का संकेत हो सकता है। लेकिन अच्छी क्वालिटी वाले AI वीडियो में ऐसी गलतियां दिखाई देना जरूरी नहीं है।
अगर सोशल मीडिया पर कोई ऐसी तस्वीर दिखाई देती है जिस पर आपको शक है, तो उसे तुरंत सच मानने के बजाय उसकी जांच करें। इसके लिए Google Lens की मदद ली जा सकती है।
तस्वीर को Google Lens पर अपलोड करके देखें कि वह पहले किसी दूसरी वेबसाइट पर प्रकाशित हुई है या नहीं। कई बार इससे तस्वीर का पुराना रूप, असली स्रोत या उससे जुड़ी खबर मिल सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी बड़े नेता या अभिनेता की कोई विवादित तस्वीर वायरल हो रही है, तो यह जांचना जरूरी है कि वह तस्वीर वास्तव में किस मौके की है।
सोशल मीडिया पर किसी बड़ी घटना का वीडियो वायरल होने पर उसे सच मानने से पहले भरोसेमंद समाचार वेबसाइटों पर भी जांच लें। अगर वीडियो में किसी बड़ी घटना, दुर्घटना या विवाद का दावा किया जा रहा है, तो देखें कि उसके बारे में कोई विश्वसनीय रिपोर्ट उपलब्ध है या नहीं।
अगर किसी पोस्ट में सिर्फ सनसनीखेज दावा किया गया है और उसके साथ कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं दिया गया, तो सावधान रहें। केवल ज्यादा लाइक या शेयर मिलने से कोई खबर सही साबित नहीं होती।
इंटरनेट पर कुछ ऐसे टूल उपलब्ध हैं जो तस्वीरों और वीडियो की जांच करने में मदद कर सकते हैं।
Google Lens: तस्वीर का स्रोत और उससे जुड़ी दूसरी जानकारी खोजने के लिए।
Google Fact Check Explorer: किसी वायरल दावे की पहले से हुई फैक्ट-चेक जांच खोजने के लिए।
InVID-WeVerify: खासकर वायरल वीडियो और तस्वीरों की जांच में मदद के लिए।
इन टूल से मिलने वाले नतीजों को भी समझदारी से देखना चाहिए। कोई टूल किसी तस्वीर को AI से बनी बता दे या असली बता दे, तो सिर्फ उसी नतीजे के आधार पर अंतिम फैसला न करें।
कई बार लोग किसी पोस्ट को मजेदार या चौंकाने वाला समझकर अपने दोस्तों और परिवार के WhatsApp ग्रुप में भेज देते हैं। लेकिन अगर वह फोटो या वीडियो नकली हो, तो इससे गलत जानकारी फैल सकती है और किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
इसलिए कोई भी संदिग्ध पोस्ट मिलने पर उसे आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई जांच लें। अगर फोटो या वीडियो किसी व्यक्ति को बदनाम कर रहा है या उसके नाम पर गलत बयान दिखा रहा है, तो उसे शेयर करने से बचें।
यह समझना भी जरूरी है कि AI से बनाई गई हर तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल गलत काम के लिए नहीं किया जाता। लोग इनका इस्तेमाल डिजाइन, मनोरंजन, विज्ञापन और पढ़ाई जैसे कई कामों में भी करते हैं। परेशानी तब होती है जब AI से बनी सामग्री को असली बताकर लोगों को गुमराह किया जाता है।
आज के समय में सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर जानकारी पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी जांच करना जरूरी हो गया है। थोड़ी सावधानी और सही जानकारी की मदद से हम खुद भी गलत खबरों से बच सकते हैं और उन्हें दूसरों तक फैलने से रोक सकते हैं।
निष्कर्ष: AI से बनी नकली फोटो और वीडियो की पहचान हमेशा आसान नहीं होती। इसलिए किसी तस्वीर में अजीब चीजें दिखने, आवाज पर शक होने या पोस्ट के वायरल होने को ही उसका सबूत न मानें। असली स्रोत खोजें, दूसरी विश्वसनीय रिपोर्ट देखें और पुष्टि होने के बाद ही किसी जानकारी पर भरोसा करें।