कुछ साल पहले तक लोग मजाक में कहते थे कि भारत बड़े हथियार तो खरीद सकता है, लेकिन दुनिया के सबसे एडवांस फाइटर जेट खुद बनाना अभी दूर की बात है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। आज जो फैसला हुआ है, उसने सिर्फ डिफेंस इंडस्ट्री नहीं, बल्कि पूरे देश के आत्...

कुछ साल पहले तक लोग मजाक में कहते थे कि भारत बड़े हथियार तो खरीद सकता है, लेकिन दुनिया के सबसे एडवांस फाइटर जेट खुद बनाना अभी दूर की बात है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। आज जो फैसला हुआ है, उसने सिर्फ डिफेंस इंडस्ट्री नहीं, बल्कि पूरे देश के आत्मनिर्भर भारत वाले सपने को एक नई रफ्तार दे दी है। भारत सरकार ने आखिरकार AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft प्रोजेक्ट के लिए Request for Proposal जारी कर दिया है। यह वही पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसकी चर्चा पिछले कई सालों से हो रही है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये रही कि इस बार सरकार ने फाइटर जेट बनाने की दौड़ में सरकारी कंपनी HAL को बाहर रखा और निजी कंपनियों को मौका दे दिया।
फाइटर जेट[/caption]
Advanced Medium Combat Aircraft सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं है, बल्कि भारत की उस महत्वाकांक्षा का हिस्सा है जिसमें देश दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतों के बराबर खड़ा होना चाहता है।
यह भारत का पहला स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर एयरक्राफ्ट होगा। आसान भाषा में समझें तो ऐसा लड़ाकू विमान जिसे दुश्मन के रडार आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे। अमेरिका के F-35 और चीन के J-20 जैसे फाइटर जेट्स की कैटेगरी में भारत अब अपना नाम दर्ज कराने की तैयारी में है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, सिस्टम इंटीग्रेशन, स्टेल्थ शेपिंग और एडवांस एवियोनिक्स पर भी भारत खुद काम करेगा। यही वो हिस्सा है जहां असली ताकत छिपी होती है।
भारतीय डिफेंस सेक्टर में यह फैसला काफी बड़ा माना जा रहा है। अब तक बड़े फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स में Hindustan Aeronautics Limited यानी HAL की प्रमुख भूमिका रहती थी। लेकिन इस बार सरकार ने नया रास्ता चुना है। अब तीन बड़े निजी समूह इस रेस में हैं:
सरकार का मानना है कि प्राइवेट सेक्टर की एंट्री से प्रोजेक्ट की स्पीड बढ़ेगी और नई टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम हो सकेगा। डिफेंस एक्सपर्ट्स भी इसे भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर के लिए “गेम चेंजर मोमेंट” बता रहे हैं।
AMCA प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई कंपनी को आंध्र प्रदेश में एक नई ग्रीनफील्ड फैसिलिटी बनानी होगी। यहीं पर पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट एयरक्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
करीब 15,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की फंडिंग पूरी तरह सरकार करेगी। हालांकि टेक्निकल डेवलपमेंट का काम Defence Research and Development Organisation के तहत काम करने वाली Aeronautical Development Agency के साथ मिलकर होगा।
असल में यह सिर्फ एयरक्राफ्ट बनाने का मामला नहीं है। इसके जरिए भारत पूरी सप्लाई चेन, एवियोनिक्स सिस्टम, कंपोजिट मटेरियल और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मजबूत करना चाहता है।
पिछले कुछ सालों में एशिया में एयर पावर को लेकर मुकाबला काफी तेज हुआ है। चीन लगातार अपने स्टेल्थ फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा रहा है, वहीं पाकिस्तान भी नई सैन्य साझेदारियों पर काम कर रहा है।
ऐसे में AMCA को सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक जरूरत माना जा रहा है। भारतीय वायुसेना को आने वाले समय में ऐसे लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी जो लंबी दूरी, कम रडार सिग्नेचर और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता रखते हों।
दिलचस्प बात ये है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता। सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में भारत खुद एडवांस हथियार सिस्टम बनाकर दूसरे देशों को भी एक्सपोर्ट करे।
AMCA को लेकर उत्साह तो काफी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाना दुनिया के सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। इंजन टेक्नोलॉजी, स्टेल्थ कोटिंग, सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी तकनीकों पर महारत हासिल करना आसान नहीं होगा।
लेकिन इस बार फर्क यह है कि भारत सिर्फ सपने नहीं दिखा रहा, बल्कि जमीन पर बड़ा ढांचा खड़ा करता दिख रहा है।
शायद यही वजह है कि आज डिफेंस सेक्टर से जुड़ी इस खबर ने लोगों का ध्यान इतनी तेजी से खींचा। क्योंकि कई बार एक फैसला सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं बदलता… वह देश की सोच बदल देता है।