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आशा भोसले: इश्क, बगावत और अपनी शर्तों पर जीने वाली आवाज खामोश… क्यों हमेशा अलग रहेंगी आशा भोसले?

आशा भोसले

आशा भोसले: आज संगीत की दुनिया से एक ऐसी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है जिसने इश्क को भी गाया और दर्द को भी, बगावत को भी गाया और देशभक्ति को भी। आशा भोसले आज हमारे बीच नहीं रही। 92 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और पीछे छोड़ गई अपनी संगीत की विरासत और एक ऐसी कहानी जो सिर्फ सुरों में ही नहीं, बल्कि फैसलों में भी बसी थी।

 आशा जी की कहानी सिर्फ मेलोडियस गानों की कहानी नहीं है। यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जो 16 साल की उम्र में प्यार के लिए घर छोड़ समाज के खिलाफ खड़ी हुई। टूटे रिश्तों के दर्द को सहा और अपनी अटूट हिम्मत से फिर दोबारा खड़ी हुई। वह लड़की जिसकी जिंदगी में मोहब्बत भी थी, तन्हाई भी, शोहरत भी थी संघर्ष भी।

वे स्टेज पर जितनी ग्लैमरस थी असल में जिंदगी में उतनी ही जिद्दी और अपने फैसलों में उतनी ही अडिग। शायद यही वजह है कि, आशा जी एक नाम नहीं बल्कि एहसास बन गई हैं। एक ऐसी विरासत जो बताती है की अपनी शर्तों पर जीने की कीमत जो भी चुकानी पड़े चुका दो क्योंकि वही जिंदगी सबसे खास होती है।

कम उम्र में लिए आशा भोसले ने लिए बड़े फैसले

आशा जी का जीवन शुरुआत से ही आसान नहीं था। उन्होंने 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर गणपतराव भोसले से शादी कर ली। उस दौर में यह किसी विद्रोह से कम नहीं था। खासकर जब उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर संगीत की दुनिया में पहले से ही स्थापित थी और परिवार परंपराओं को महत्व देता था।

लेकिन यह शादी सफल नहीं रही। घरेलू हिंसा और मानसिक तनाव के कारण आशा जी को यह रिश्ता छोड़ना पड़ा। उस दौर में एक महिला का इस तरह शादी तोड़ना भी समाज के लिए काफी चौंकाने वाला मामला था पर यही से आशा जी की असली ताकत सामने आई।

अपने फैसले खुद लेने का रिस्क

आशा भोंसले उस दौर में आधुनिक सोच रखती थी। उन्होंने अपने फैसलों को लेकर हमेशा एक स्पष्ट नियम अपनाया, चाहे करियर चुनना हो या निजी जीवन के फैसलों पर उन्होंने कभी भी समाज के दबाव में आकर समझौता नहीं किया। संगीत में भी उन्होंने अपने रूप से प्रयोग किया। कैबरे, पॉप, गजल, क्लासिकल हर शैली में खुद को ढाला।

जहां एक तरफ लता मंगेशकर शास्त्रीय और पारंपरिक गीतों के लिए जानी जाती थी। वही आशा जी ने ‘दम मारो दम’ जैसे बोल्ड और मॉडर्न गानों से अपनी पहचान बनाई। आशा भोंसले के गानों में ही केवल आधुनिकता नहीं झलकती थी बल्कि उनका व्यक्तित्व भी आधुनिक था। खुले विचार, आत्मविश्वास और जीवन को अपने तरीके से जीने की चाहत।

आशा भोसले

आशा भोसले के जीवन में फिर आई प्यार की दस्तक

आशा भोसले की लव लाइफ भी काफी दिलचस्प और अलग रही। गणपत राव भोसले के साथ पहली शादी असफल होने के बाद उन्होंने लंबे समय तक अपने बच्चों की परवरिश अकेले की। फिर उनके जीवन में आए ‘राहुल देव बर्मन’ जिन्हें हम सब ‘पंचम दा’ के नाम से जानते हैं। दोनों के बीच काफी क्रिएटिव समझ थी और धीरे-धीरे प्यार भी पनपने लगा। दोनों ने मिलकर इंडस्ट्री को हज़ारों हिट गाने दिए और एक दूसरे को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। आशा जी और पंचम दा की शादी प्यार, उम्र, हालात, समाज और सीमाओं से परे का रिश्ता था।

क्यों रहेंगी आशा भोंसले सबसे अलग?

आशा जी की एक बहुत बड़ी खासियत थी कि वह खुद को कभी भी एक ही दायरे में नहीं बांध पाईं। उन्होंने गलत फैसले भी लिए लेकिन उनसे सबक सीखा। समाज के खिलाफ जाकर अपनी अलग राह बनाई। आधुनिकता को अपनाया लेकिन परंपरा को नहीं छोड़ा। प्यार किया, सपने टूटे लेकिन फिर से दोबारा प्यार करने की हिम्मत दिखाई।

आज आशा भोसले हम सभी को अलविदा कह कर इस दुनिया से जा चुकी हैं। उनका जाना भारतीय फ़िल्म जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। लेकिन उन्होंने अपनी सोच और अपने व्यक्तित्व से समाज को यह बताया है की पहचान बनाने के लिए नियम तोड़ना गलत नहीं होता।

उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणादाई है जो अपनी शर्तों पर जीना चाहती है। बग़ीपन और परंपरा का ऐसा संतुलन शायद किसी और गायक में कभी देखने को मिले। इसीलिए आशा भोसले ने साबित किया है की एक औरत अपनी जिंदगी खुद लिख सकती है चाहे दुनिया कुछ भी कहे।

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