MP के प्राइवेट स्कूल की शर्मनाक हरकत की वजह से शिक्षा विभाग एक बार फिर से शर्मसार हो चुका है। जी हां, सतना (मध्य प्रदेश) के एक निजी स्कूल से एक दिल पसीज देने वाला मामला सामने आया है। सतना के एक निजी स्कूल की एक शिक्षिका ने 6 साल की नन्ही बच्ची को होमवर्क न करने के लिए इतनी जोर से थप्पड़ जड़ा की बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और गिरने की वजह से उसका हाथ फैक्चर हो गया। इस हरकत से अब एक बार फिर से शिक्षा स्थान की जिम्मेदारी और शिक्षक-शिष्य संबंध पर प्रश्न उठने लगे हैं?
आइये जानते हैं क्या है सतना (MP) के इस प्राइवेट स्कूल की यह पूरी घटना?
यह घटना मध्य प्रदेश के सतना शहर के अमौधा क्षेत्र में स्थित CMA विद्यालय की है। जहां 6 साल की नन्ही बच्ची ‘किशोरी’ रोज की तरह कड़ाके की ठंड में सुबह स्कूल आई। लेकिन इस दिन उसने एक गलती कर दी। हालांकि यह गलती इतनी बड़ी नहीं थी, लेकिन फिर भी उसे सजा बहुत बड़ी मिली।
बच्ची की गलती केवल इतनी थी कि उसने अपनी छोटी बहन के जन्मदिन की वजह से इंग्लिश का होमवर्क पूरा नहीं किया। जब कक्षा में अगले दिन इंग्लिश टीचर ‘सपना खरे’ ने जब होमवर्क दिखाने के लिए कहा तो किशोरी नहीं दिखा पाई। जिसकी वजह से टीचर सपना खरे ने गुस्से में आकर बच्ची को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ इतना जोरदार था की बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़ी जिसकी वजह से उसके हाथ की हड्डी टूट गई।
परिजनों की चिंता और स्कूल का रूखापन
परिजनों का कहना है कि जब बच्ची घर पहुंची तब उसके हाथ पर प्लास्टर था। उन्होंने जब बच्ची से पूछा तब बच्ची ने पूरा विवरण अभिभावकों को सुना दिया ।परंतु बच्ची अभी भी काफी डरी हुई है। बच्ची के हाथ में प्लास्टर देखकर पिता काफी क्रोधित हुए और उन्होंने सीधा स्कूल प्रिंसिपल से शिकायत की। जब पिता ने सीसीटीवी फुटेज दिखाने की बात कही तो स्कूल प्रिंसिपल ने फुटेज दिखाने से इनकार कर दिया। कारण पूछने पर कहा जा रहा है कि क्लास रूम का सीसीटीवी कैमरा खराब है। इसके बाद परिजनों ने सिविल लाइन थाने में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में परिजनों ने बताया है कि स्कूल में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है और स्कूल सीसीटीवी फुटेज दिखाने से इनकार कर रहा है।
विद्यालय और शिक्षा विभाग पर उठ गए सवाल
इस घटना की वजह से बच्चों की सुरक्षा पर अब एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। सरकारी स्कूल तो पहले से ही सवालों के घेरे में थे। पर निजी स्कूलों में भी इस प्रकार का व्यवहार परिजनों के लिए किसी अत्याचार से कम नही है। जी हां, भारी भरकम फीस देकर परिजन अपने बच्चों को निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा के लिए भेजते हैं। ऐसे में यहां से भी यदि 6 साल की नन्ही जान के साथ इस प्रकार के व्यवहार की खबर आये तो यह परिजनों के लिए संवेदनशील मामला हो जाता है। इस घटना की वजह से सवाल उठ खड़े हुए हैं कि क्या बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा ? क्या शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ हिंसा करना सही है? क्या शिक्षक और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल पढाना है कि बच्चों की भलाई भी सुनिश्चित करना है?
शिक्षा स्तर और अनुशासन का अभाव
- सतना में हुई यह घटना इस बात का प्रमाण देती है कि बच्चों की सुरक्षा अब प्राथमिकता नहीं रही।
- अब शिष्य और शिक्षक के संबंध उतने गहरी नहीं रहे।
- शिक्षकों में भी धैर्य और संवेदनशीलता की कमी देखी जा रही है।
- वहीं शिक्षकों को यह समझना होगा कि कानून के अनुसार बच्चों को शारीरिक दंड देना हिंसा कहा जाता है जो कि अपराध है।
- वहीं अभिभावकों को भी इस मामले में पूरा हक है कि वह स्कूल में हुई अनुचित घटना की शिकायत करें और सीसीटीवी फुटेज की मांग करें ।
- स्कूल प्रशासन की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि इस पूरी घटना की जांच पड़ताल में परिजनों की सहायता करें।
बच्चों के हित में कौन से बदलाव है जरूरी
उपरोक्त मामला केवल MP के सतना तक ही सीमित नहीं है। यह मामला है संपूर्ण शिक्षा विभाग का है। ऐसे में शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वह संवेदनशील बने।
बच्चों की मनोवैज्ञानिक सोच को समझने की कोशिश करें।
स्कूलों में सीसीटीवी और सुरक्षा मानक लागू करें ताकि शिक्षक जवाबदेही ले सकें।
वही अभिभावक और स्कूल प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत किया जाए, हर घटना पर स्प्ष्ट रूप से विचार विमर्श हो जिससे इस प्रकार की होने वाली हिंसक घटनाओं पर काबू पाया जा सके।
साथ ही सभी स्कूलों के लिए जरूरी है कि वह शारीरिक दंड पर सख्त प्रतिबंध लागयें और जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएं।
मध्य प्रदेश के सतना के CMA विद्यालय की यह घटना केवल एक थप्पड़ कांड नहीं है। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा नीतियों पर जड़ा गया तमाचा है। कैसे एक टीचर के गुस्से की वजह से एक वर्ष की मासूम बच्ची चोटिल हो जाती है। हालांकि बच्ची की चोट तो ठीक हो जाएगी लेकिन क्या मानसिक रूप से बच्ची के ज़हन पर लगी चोट भर पाएंगी? क्या बच्ची अपने अंदर के इस डर को निकाल पाएगी? इस प्रकार के कई सवाल एक बार फिर से सतह पर आ पहुंचे हैं जिसका हल निकालना बेहद जरूरी है।
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