साल का पहला चंद्र ग्रहण होली पर, कब मनाई जाएगी होली
Holi and Holika Dahan 2026: होली कब है- होली का इंतज़ार लोग साल भर करते हैं, लेकिन इस बार 100 साल बाद होली के रंग में भंग पड़ रहा है। होली का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो फाल्गुन की पूर्णिमा को होता है। 2026 में होली पर चंद्र ग्रहण लगेगा, जो बहुत खास होने वाला है। इस बार 100 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है।
होलिका दहन और रंगों की होली पर चंद्र ग्रहण का साया
होलिका दहन और रंगों की होली दोनों पर चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक काम वर्जित होते हैं। मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित होते हैं। आइए जानते हैं कि होली पूजा, होलिका दहन और रंगों वाली होली (Holi and Holika Dahan 2026) कैसे मनाई जाएगी।
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होली और होलिका दहन कब (Holi and Holika Dahan)
होली का पवित्र त्योहार दो दिन मनाया जाता है। एक दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगवाली होली खेली जाती है। लेकिन इस साल होलिका दहन के दिन, यानी 3 मार्च, 2026 को दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण लगेगा। इसलिए, हर कोई इस बात को लेकर कंफ्यूज है कि क्या ग्रहण की वजह से होलिका दहन की तारीख बदलेगी।
हालांकि, ग्रहण से होलिका दहन की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि चंद्र ग्रहण शाम 6:47 बजे खत्म हो जाएगा। इसलिए, होलिका दहन शाम 6:47 बजे के बाद किया जा सकता है। होलिका दहन का पवित्र त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

कहां होगा इसका असर
2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण से नौ घंटे पहले सुबह 6:20 बजे सूतक काल शुरू हो जाएगा और चंद्र ग्रहण खत्म होने तक रहेगा। यह 3 घंटे, 27 मिनट का चंद्र ग्रहण भारत में दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में चांद निकलने के समय लगभग 30 से 35 मिनट तक दिखाई देगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। पूजा करना पाप माना जाता है।
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को किया जाता है, जिसका शुभ समय 3 मार्च को शाम 6:48 से 8:50 बजे तक है। जबकि कुछ कैलेंडर में होलिका दहन 2 मार्च को पूर्णिमा के दिन शाम 5:56 बजे से प्रदोष काल में किया जाएगा, 2 मार्च को भद्रा रहेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, होलिका दहन और रक्षा बंधन के दौरान भद्रा का विचार किया जाता है।
होलिका दहन 2026 मुहूर्त (Holi 2026)
होलिका दहन का शुभ समय 3 मार्च, 2026 को शाम 6:47 बजे से रात 8:50 बजे तक रहेगा। इस शुभ समय में होलिका पूजा करना शुभ रहेगा। होलिका दहन का पवित्र त्योहार फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल यह पूर्णिमा 2 मार्च, 2026 को शाम 5:55 बजे से 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी।
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बन रहीं दो स्थितियां
ज्योतिष पंडित के अनुसार, ऐसी स्थिति हर कुछ सालों में आती है। इस साल भद्रा की छाया के दौरान होलिका दहन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। क्योंकि 2 मार्च की रात को भद्रा दोष रहेगा और 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि की उदया तिथि है, इसलिए मुख्य कैलेंडर के अनुसार, उदया तिथि के प्रभाव में चंद्र ग्रहण का सूतक काल खत्म होने के बाद 3 मार्च को होलिका दहन करना सुरक्षित रहेगा। भले ही तब तक पूर्णिमा तिथि खत्म हो चुकी हो, लेकिन उस दिन पूर्णिमा तिथि की उदया तिथि होगी।
दोनों ही मामलों में होलिका दहन किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को होली की पूजा एक दिन पहले, 2 मार्च को ही करनी होगी, क्योंकि ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे शुरू होगा और चंद्र ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।
कब मनाई जाएगी होली (Holi 2026)
इस साल रंगों वाली होली या धुलेंडी 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। कैलेंडर के अनुसार, रंगों वाली होली चैत्र के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है।
















