मंगलवार सुबह घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला। कीमती धातुएं 1 फीसदी से ज्यादा चढ़कर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.2 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹1,38,381 प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.7 प्रतिशत उछलकर ₹2,16,596 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार करती दिखी। सुबह करीब 10:10 बजे सोना ₹1,38,214 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,16,090 प्रति किलो पर बनी हुई थी।
वैश्विक संकेतों से मिला मजबूत सहारा
सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है। इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने भी कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया। मंगलवार के सत्र में डॉलर इंडेक्स करीब 0.20 फीसदी गिरा, जिससे विदेशी मुद्राओं में सोना सस्ता हुआ और इसकी मांग बढ़ी।
अमेरिका–वेनेजुएला तनाव बना नया ट्रिगर
रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यूएस कोस्ट गार्ड ने इस महीने प्रतिबंधों के तहत वेनेजुएला का तेल ले जा रहे एक सुपरटैंकर को जब्त किया है। इसके अलावा सप्ताहांत में दो अन्य वेनेजुएला से जुड़े जहाजों को रोकने की भी कोशिश की गई। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश के तौर पर मजबूत मांग मिली है।
2025 में अब तक का शानदार प्रदर्शन
इस साल सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। घरेलू स्पॉट गोल्ड की कीमतें 2025 में अब तक करीब 76 फीसदी बढ़ चुकी हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 70 फीसदी ऊपर है। अगर यही रुझान बना रहता है तो यह 1979 के बाद सोने का सबसे मजबूत साल साबित हो सकता है, जब महंगाई के झटके के कारण कीमतों में 123 फीसदी से ज्यादा उछाल आया था। चांदी ने इस दौरान सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया है और घरेलू बाजार में इसकी कीमतें 142 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।
कई वजहों से बनी हुई है तेजी
बाजार जानकारों के मुताबिक इस तेजी के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारक एक साथ काम कर रहे हैं। केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का संभावित असर और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव ने सोना और चांदी दोनों को मजबूती दी है। इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में लगातार हो रहा निवेश भी कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए है।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष अक्षा कंबोज का कहना है कि सोने की कीमतें पिछले हफ्ते से लगातार नए स्तर बना रही हैं, जिससे इसकी सेफ-हेवन मांग मजबूत बनी हुई है। उनके अनुसार महंगाई को लेकर चिंताएं, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदें कीमतों को सहारा दे रही हैं। हालांकि अल्पावधि में कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।
तकनीकी स्तरों पर नजर
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक मौजूदा तेज़ रैली के बाद बाजार में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। MCX पर सोने को निचले स्तरों पर सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपरी स्तरों पर रुकावट बन सकती है। चांदी में भी मजबूत तेजी के बाद करेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि कुल मिलाकर ट्रेंड अभी भी मजबूत बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने रचा इतिहास
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने पहली बार 70 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की इस तेजी के पीछे सप्लाई की भारी कमी है। लंदन, चीन और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में चांदी का भौतिक स्टॉक कई साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि सोलर सेक्टर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
सप्लाई संकट और नीतिगत फैसलों का असर
टाटा म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों को निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से भी मजबूती मिल रही है। हाल के हफ्तों में सिल्वर ईटीएफ में निवेश बढ़ा है, जिसने पहले देखी गई निकासी की भरपाई कर दी है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा चांदी को अहम खनिज घोषित करना और चीन की ओर से इसके निर्यात पर सख्ती करना भी वैश्विक सप्लाई को और सीमित कर रहा है।
भारत में भी मजबूत बनी हुई है मांग
भारत में चांदी की मांग भी मजबूत बनी हुई है। सितंबर और अक्टूबर के दौरान देश ने 2,600 टन से ज्यादा चांदी का आयात किया है। जानकारों का मानना है कि घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए चांदी की कीमतों में आगे भी तेजी बनी रह सकती है, हालांकि तेज़ उछाल के बाद करेक्शन का जोखिम हमेशा रहता है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं – कुल मिलाकर सोना और चांदी दोनों ही इस वक्त कमजोर डॉलर, बढ़ते वैश्विक तनाव और मजबूत निवेश मांग के दम पर नई ऊंचाइयों पर बने हुए हैं। आने वाले समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल कीमती धातुओं की चमक बरकरार नजर आ रही है।

