शेषनाग 150 : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल ईरान के बीच जारी ड्रोन हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान नई आधुनिक युद्ध नीति की तरफ आकर्षित किया है। इस युद्ध ने बताया है कि अब जंग फाइटर जेट और मिसाइल से नहीं बल्कि कम लागत वाले ड्रोन से लड़ी जाएगी। जी हां, मिडल ईस्ट की जंग में ईरान काफी कम बजट वाले शाहेद नाम के ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। यह ड्रोन काफी सस्ते हैं। एक ड्रोन करीबन $20,000 का बनाया जा रहा है, जो कि US और इजरायल के लाखों करोड़ों की मिसाइल को मात दे रहा है।
भारत भी इसी प्रकार के भविष्य के लिए पूरी तरह से तैयार है। बता दें भारत के पास में भी अपना स्वदेशी निर्मित लॉन्ग रेंज ड्रोन शेषनाग 150 है। यह ड्रोन केवल एक निगरानी उपकरण नहीं है बल्कि असल में यह 1000 किलोमीटर की दूरी तक सटीक वार करने की क्षमता रखता है। यह ड्रोन स्वार्न टेक्नोलॉजी और इंडिविजुअल नेविगेशन जैसे उन्नत फीचर के साथ तैयार किया गया है जो चुटकियों में दुश्मन के एयर डिफेंस को कई दिशाओं से घेर सकता है। सबसे खास बात है इसकी कम लागत यह भी लाखों रुपए की मिसाइल्स को चुनौती दे सकते हैं।
क्या है भारत में निर्मित शेषनाग 150 ?
भारत का अपना खुद का निर्मित शेषनाग 150 एक लंबी दूरी का स्वार्न अटैक ड्रोन है जो बेंगलुरु के न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित किया गया है। इसकी सबसे खास बात है स्वदेशी निर्मित यह ड्रोन बल्क में तैयार किए गए हैं जिसकी लागत बहुत ही कम है। यह हमारे देश की बॉर्डर की सुरक्षा के साथ-साथ दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भी असहाय कर सकता है।

शेषनाग 150 की टेक्निकल विशेषताएं और फायदे
- यह ड्रोन 1000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज में अटैक कर सकता है।
- यह दुश्मनों के छिपे हुए इलाकों में पहुंचकर हाई वैल्यू लक्ष्य साध सकता है और उन्हें चुटकियों में निस्तेज कर सकता है।
- इसकी 5 घंटे बिना रुके उड़ान भरने की क्षमता लगातार निगरानी करने और हमले की स्थिति में अपडेट देने के लिए यह ड्रोन पूरी तरह से तैयार है।
- यह ड्रोन भारी वारहेड और पेलोड भी ले जा सकता है। करीबन 25 से 40 किलोग्राम का भारी वारहेड यह कैरी कर सकता है जो दुश्मन के इलाकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- शेषनाग 150 स्वार्न टेक्नोलॉजी और इंडिविजुअल ऑपरेशन के लिए बनाया गया है।
- मतलब यह ड्रोन एक साथ आपस में ताल मेल बिठाकर सामूहिक हमला भी कर सकते हैं।
- इसकी नेविगेशन प्रणाली GPS से बिल्कुल अलग है।
- शेषनाग सिस्टम में विजुअल नेविगेशन जैसी तकनीक इस्तेमाल की गई है जो ब्लाइंड स्पॉट स्थिति में भी काम कर सकता है।
क्यों भारत निर्मित ड्रोन दुनिया भर की चर्चा में आ चुका है?
वर्तमान में जारी युद्ध ने स्पष्ट रूप से दिखा दिया है की महंगी मिसाइल और महंगे और इक्विपमेंट देश की रक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। ऐसे युद्ध के दौरान देश के पास से ऐसे उपकरण होने चाहिए जो कम लागत में बने हो जिनका निशाना एकदम सटीक हो। हाल ही में मिडिल ईस्ट वार में ईरान ऐसी ही तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। ईरान में निर्मित शाहेद 136 जैसे सुसाइड ड्रोन अमेरिका और इजरायल की वॉर टेक्नोलॉजी को चुनौती दे रहे हैं।
ऐसा ही रणनीतिक जवाब भारत भी तैयार कर चुका है शेषनाग 150 के माध्यम से। यह कम लागत वाला, ज्यादा संख्या में तैयार और इंडिविजुअल लड़ाई की क्षमता रखने वाला एक उन्नत डिफेंस सिस्टम है जो दुश्मन पर हमला भी कर सकता है। यह देश के बाउंड्री का निरीक्षण भी कर सकता है और लगातार 5 घंटे तक दुश्मन को रोकने के लिए वारहेड और पेलोड ले जाकर उनके सैन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है।
कुल मिलाकर भारत दिन-ब-दिन डिफेंस सिस्टम को बेहतर कर रहा है। शेषनाग 150 इसी का ही एक उन्नत उदाहरण है जो बताता है कि कैसे तकनीकी क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत की रक्षा क्षमताओं में भी दिन-ब-दिन विकास हो रहा है और इसीलिए जल्द ही भारत ग्लोबल मार्केट में हथियारों और डिफेंस सिस्टम का एक बहुत बड़ा मार्केट बनने वाला है।
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