Tata Sons चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि चिप प्रोजेक्ट में समय लगेगा पर Tata Group निर्माण जारी रखेगा। नोएल टाटा से विवाद और निवेश योजना की पूरी जानकारी।

Tata Sons के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने कहा है कि Tata Group दुनिया और भारत की जरूरत के हिसाब से निर्माण करता रहेगा। उन्होंने साफ किया कि सेमीकंडक्टर चिप जैसे प्रोजेक्ट में ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन ग्रुप इन पर काम जारी रखेगा। उन्होंने यह बात मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुए Bloomberg New Economy Forum 2026 में कही।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब Tata Group के भीतर बोर्डरूम विवाद चल रहा है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार चंद्रशेखरन के अपने पुनर्नियुक्ति और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा से मतभेद गहरे हुए हैं।
चंद्रशेखरन ने कहा कि ग्रुप की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा की दिशा तय है, जरूरत तय है और काम पूरा करने की क्षमता भी तय है। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, बड़ा बाजार और निर्माण की क्षमता है। उनके अनुसार एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का दायरा बढ़ने के साथ दुनिया में सेमीकंडक्टर की जरूरत बुनियादी तौर पर बढ़ेगी।
Business Standard के अनुसार चंद्रशेखरन ने कहा कि सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग भारत के भविष्य के लिए अहम हैं। इन्हें सिर्फ इस आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए कि अगले दो-तीन साल में लक्ष्य पूरे हुए या नहीं।
Whalesbook की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी चेताया कि बिना बाजार की मांग जाने बहुत एडवांस्ड तकनीकी नोड्स के पीछे दौड़ना जोखिम भरा है। उन्होंने दो नैनोमीटर जैसे जटिल प्लांट का उदाहरण दिया, जहां चिप कहां बिकेगी यह पता न हो। उनके अनुसार लंबे समय की सफलता के लिए सिर्फ तकनीकी प्रतिष्ठा नहीं, व्यावसायिक स्थिरता जरूरी है। यह रिपोर्ट अपेक्षाकृत कम जाने-माने स्रोत की है और इसके कुछ आंकड़े (जैसे ₹1.18 लाख करोड़ का विस्तार) की हमने स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
करीब 160 साल पुराने Tata Group ने पिछले वित्त वर्ष में 185 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया था। खबर के अनुसार अब ग्रुप अगले विकास चरण के लिए 120 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है। इसकी एक अहम कड़ी भारत की पहली चिप निर्माण इकाई है, जो भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षा से जुड़ी है।
Bloomberg News की एक रिपोर्ट के मुताबिक Tata Electronics देश के पहले बड़े पैमाने के चिप उत्पादन प्लांट पर काम कर रही है और उसे परिचालन से जुड़ी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। चंद्रशेखरन का संदेश यही रहा कि समय और परिचालन की चुनौतियों के बावजूद ग्रुप निवेश जारी रखेगा।
Tata Sons में नियंत्रण वाले हिस्सेदार Tata Trusts के पास कंपनी की करीब 66% हिस्सेदारी है। Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा और Tata Sons के चेयरमैन चंद्रशेखरन के बीच निवेश और शेयरधारकों को रिटर्न की रणनीति पर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं।
| समय | घटना |
|---|---|
| फरवरी 2026 | नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर आपत्ति जताई। Tata Sons बोर्ड ने 24 फरवरी को फैसला टाल दिया |
| फरवरी के बाद | Tata Trusts ने उत्तराधिकारी की तलाश शुरू की |
| अगस्त 2026 | चंद्रशेखरन ने कहा कि बोर्ड का एकमत समर्थन न मिलने से वे अगले साल फरवरी में कार्यकाल खत्म होने पर पद छोड़ देंगे |
| सितंबर 2026 | बोर्ड ने उन्हें अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त किया। नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया |
| सितंबर 2026 | Tata Trusts ने कानूनी सलाह का हवाला देकर इस नियुक्ति को Articles of Association के तहत अवैध कहा। Tata Sons ने यह व्याख्या खारिज की |
एक विश्लेषण के अनुसार नोएल टाटा चाहते थे कि चंद्रशेखरन के विस्तार से पहले बोर्ड को कुछ भरोसा दिया जाए। इसमें Air India और Tata Digital के घाटे को रोकना, सेमीकंडक्टर और बैटरी कारोबार में खर्च पर नजर रखना, Tata Sons को अनलिस्टेड रखना और Shapoorji Pallonji (SP) समूह के बाहर निकलने का रास्ता निकालना शामिल था। यह विश्लेषकीय राय है, किसी आधिकारिक बयान का सार नहीं।
Bloomberg की 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार Tata Sons बोर्ड ने बहुमत से कंपनी को सार्वजनिक (लिस्ट) करने को मंजूरी दी और चंद्रशेखरन से पांच और साल रुकने को कहा। Tata Trusts ने कहा कि वह लिस्टिंग पर सहमत नहीं है और बोर्ड को सभी विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
उसी बैठक में नोएल टाटा ने SP Group का एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें Tata Sons में उसकी कुछ हिस्सेदारी का मुद्रीकरण होता और कम से कम 250 अरब रुपये (करीब 2.6 अरब डॉलर) जुटते। यह जानकारी Tata Trusts के बयान के हवाले से दी गई थी।
रिपोर्टों में ग्रुप के नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई की आशंका जताई गई है। अभी तक किसी अदालती कार्यवाही की पुष्टि हमारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
चंद्रशेखरन ने माना कि ग्रुप मुश्किल दौर से गुजर रहा है। Air India को पिछले साल बड़े विमान हादसे का सामना करना पड़ा। साइबर हमले और सप्लाई चेन की बड़ी रुकावटें भी सामने आईं।
इसके बावजूद खबर के मुताबिक ग्रुप के मार्जिन स्थिर रहे हैं और ग्रोथ दोहरे अंकों में बनी हुई है। उनका संदेश यह रहा कि Tata Group भारत की लंबी अवधि की जरूरतों के मुताबिक निवेश और निर्माण जारी रखेगा।