भोपाल मंडल के 5 स्टेशनों पर लगाई गई बॉटल क्रश मशीन, यहां वहां बॉटल फेंकने से मिलेगी निजात      

भोपाल रेल मंडल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी दिशा में काम करते हुए मंडल द्वारा होशंगाबाद, सांची, विदिशा, गंजबासौदा और शिवपुरी स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रश मशीन की स्थापना की गई है। इस मशीन की स्थापना के बाद रेलयात्री पानी की बोतलों काे उपयोग करने के बाद यहां-वहां फेंकने के बजाय प्लास्टिक क्रश मशीन में नष्ट करेंगे, जिससे प्लास्टिक वेस्ट का सही तरह से निपटारा हो सकेगा।

भोपाल मंडल के 5 स्टेशनों पर लगाई गई बॉटल क्रश मशीन, यहां वहां बॉटल फेंकने से मिलेगी निजात         
भोपाल रेल मंडल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी दिशा में काम करते हुए मंडल द्वारा होशंगाबाद, सांची, विदिशा, गंजबासौदा और शिवपुरी स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रश मशीन की स्थापना की गई है। इस मशीन की स्थापना के बाद रेलयात्री पानी की बोतलों काे उपयोग करने के बाद यहां-वहां फेंकने के बजाय प्लास्टिक क्रश मशीन में नष्ट करेंगे, जिससे प्लास्टिक वेस्ट का सही तरह से निपटारा हो सकेगा। यह मशीन मण्डल के भोपाल, हबीबगंज, इटारसी और बीना स्टेशन पर पहले से ही लगी हुई हैं।

इस मशीन के लग जाने से खाली प्लास्टिक की बोतल को आसानी से नष्ट किया जा सकेगा और प्लास्टिक का फिर से उपयोग हो सकेगा। साथ ही प्लास्टिक वेस्ट से पर्यावरण को हो रहे नुकसान से भी बचा जा सकेगा।

जलाने की बजाय मशीन में नष्ट करें : 
भोपाल मंडल के सीनियर डीसीएम विजय प्रकाश ने StackUmbrella को बताया कि स्वच्छ पर्यावरण के लिए एनजीटी के दिशानिर्देश में मंडल के स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रश मशीन लगाई गई हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील है कि वह प्लास्टिक की बॉटल का उपयोग होने के बाद यहां-वहां फेंकने के बजाय इस क्रश मशीन में डालकर उसे नष्ट कर दें। क्योंकि प्लास्टिक वेस्ट को नष्ट करने के लिए उसे जलाने पर जहरीला धुआं निकलता है, जो पर्यावरण एवं मानव जीवन के लिए घातक है।


लगातार जागरुकता फैलाता रहा है भोपाल मंडल : 
इससे पहले भी मंडल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण काम करता रहा है। मंडल द्वारा स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाना, ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग, सघन वृक्षारोपण, यात्रियों को प्लास्टिक के थैले का उपयोग बन्द कर सूती कपड़े के थैलों का उपयोग अपने व्यवहार में लाने के प्रति जागरूक करना जैसे काम पहले भी किए जाते रहे हैं।

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