Agriculture

बिहार के सासाराम शहर में लगे किसान मेले में दिखा 12 किलो, 20 इंच मोटा और 41 इंच लंबा “महामूली” 

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार के सासाराम शहर में लगे किसान मेले में दिखा 12 किलो, 20 इंच मोटा और 41 इंच लंबा “महामूली” 

बिहार के सासाराम में मकर संक्रांति के मौके पर लगे किसान मेले में इस बार कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने सबको चौंका दिया. यहां एक किसान 12 किलो की मूली लेकर पहुंचा, जिसकी मोटाई करीब 20 इंच और लंबाई लगभग 3.5 फीट है. इतनी बड़ी मूली देखकर मेले में आए लोग रुक-रुककर फोटो और वीडियो बनाते नजर आए.

बताया जा  रहा है की किसान मेले में जैसे ही महामूली को लाया गया, वैसे ही उसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोग इस अनोखी मूली के साथ फोटो खिंचवाते नजर आए, तो वहीं किसान इसकी खेती की तकनीक के बारे में जानकारी लेते दिखे।

इस मूली को जिसने लाया था उनका नाम क्या था और कहा का रहने वाला था 

किसान का नाम ददन सिंह है और वह नौगाईं गांव के रहने वाला है ,बताया गया की किसान ददन सिंह द्वारा उत्पादित 12 किलो की मूली पूरे दिन आकर्षण का केंद्र बनी रही. बाजार समिति के कोषाध्यक्ष कमलेश कुमार ने बताया कि यह मूली प्रदर्शनी की सबसे चर्चित सब्जियों में शामिल रही, जिसे देखने के लिए लोग खास तौर पर पहुंचते रहे.

इस महामूली को उगाने वाले किसान ने बताया कि उन्होंने उन्नत बीज, संतुलित जैविक खाद और सही सिंचाई प्रबंधन का इस्तेमाल किया। साथ ही मिट्टी की नियमित जांच और समय पर देखभाल से इतनी बड़ी मूली उगाना संभव हो पाया।

किसान और दर्शकों में पूरा दिन उत्साहित

किसान मेले में प्रदर्शित 12 किलो की महामूली को देखकर किसान और दर्शक दोनों ही बेहद उत्साहित नजर आए। आसपास के गांवों से आए किसानों ने इसे उन्नत खेती और मेहनत का बेहतरीन उदाहरण बताया। कई किसानों ने कहा कि अगर सही तकनीक, अच्छे बीज और संतुलित खाद का उपयोग किया जाए, तो सब्जी की खेती में भी बेहतर उत्पादन और मुनाफा संभव है।

किसान और दर्शकों में पूरा दिन उत्साहित

वहीं, मेले में पहुंचे आम दर्शकों के लिए यह महामूली किसी अजूबे से कम नहीं थी। लोग इसकी लंबाई और मोटाई देखकर हैरानी जता रहे थे और मोबाइल से फोटो व वीडियो बनाते दिखे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए यह महामूली आकर्षण का केंद्र बनी रही।

कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसी उपलब्धियां किसानों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को खेती से जोड़ने का काम करती हैं।

 

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