2020 के सबसे निडर पत्रकार जिन्होनें सही मायनो में की देश के लिए रिपोर्टिंग

2020 पूरी दुनिया के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा है। लेकिन महामारी के कारण डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों, प्रशासकों और पत्रकारों के लिए यह और भी कठिन था। एक तरफ जहां डॉक्‍टरों और पुलिस कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर देश की बुनियाद संभाली वहीं दूसरी और कुछ निडर पत्रकारों ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग से देश की सच्‍चाई और लोगों का दर्द दुनिया के सामने रखा।

2020 के सबसे निडर पत्रकार जिन्होनें सही मायनो में की देश के लिए रिपोर्टिंग
2020 के सबसे निडर पत्रकार जिन्होेनें सही मायनो मे की देश के लिए रिपोर्टिंग

2020 पूरी दुनिया के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा है। लेकिन महामारी के कारण डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों, प्रशासकों और पत्रकारों के लिए यह और भी कठिन था। एक तरफ जहां डॉक्‍टरों और पुलिस कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर देश की बुनियाद संभाली वहीं दूसरी और कुछ निडर पत्रकारों ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग से देश की सच्‍चाई और लोगों का दर्द दुनिया के सामने रखा।

आइए नजर डालते हैं 2020 के कुछ ऐसे पत्रकारों पर जिन्‍होनें अपनी रिपोर्टिंग से सही मायनों में पत्रकारिता की मिशाल कायम की।

  1. तनुश्री पांडे

2020 में हुई देश को हिला देने वाली घटना हाथरस बलात्‍कार की रिपोर्टिंक करना एक बहुत ही कठिन काम था क्‍योंकि इस मामलें में स्‍थानीय पुलिस का भी हाथ था। कई पत्रकारों मे से एक तनुश्री पांडे ने हाथरस बलात्कार मामले की उनकी अथक और महत्वपूर्ण जमीनी रिपोर्टिंग ने यह सुनिश्चित किया कि लोगों को सच्चाई का पता चले। उसने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को मामले के प्रमुख घटनाक्रम के बारे में बताया।

  1. बरखा दत्त

दिग्गज पत्रकार बरखा दत्त ने हजारों प्रवासियों की कहानियों को सामने लाया जब भारतीय देशव्यापी लॉकडाउन ये मजदूर बेघर हो गए। उन्‍होनें इन मजदूरों की कहानियों को कवर करने के लिए महामारी के बीच मीलों की यात्रा की और एक महत्वपूर्ण समय पर सरकार से पूछताछ की।

  1. रवीश कुमार

पुरस्कृत पत्रकार की प्राइम टाइम रिपोर्टिंग पूरे साल चर्चाओ में रही विवादों से घिरे होने पर भी सरकार से प्रत्‍येक सवाल का जबाव मांगा गया, प्रवासी मजदूर हो या हाथरस मालला 2020 के सभी मुद्दों पर खुलकर सरकार से सवाल करने वाले रवीश कुमार हर साल की तरह इस साल भी लोगों की पसंद बने रहे।

  1. राना आयूब

मार्च में भारत में तालाबंदी शुरू होने के बाद से ही, राना आयूब को प्रवासी संकट को कवर करते हुए और जरूरत पड़ने पर सरकार को निष्क्रिय करने के लिए रिपोर्टिंग करते हुए देखा गया। उन्‍होनें अपने पत्रकार कर्तव्यों के साथ ही राहत कार्य में भी हिस्‍सा लिया और संकट के समय जरूरतमंदों को भोजन भी दिया।

  1. जगत बैंस

News18 हिमाचल के पत्रकार जगत बैंस ने कोरोना लॉकडाउन के तहत सरकार की रणनीतियों पर सवाल उठाए। हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ के कुछ हिस्सों में प्रवासी श्रमिकों तक राशन नहीं पहुंच रहा है, इस बारे में एक वीडियो रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद उन्‍हे जेल भी जाना पड़ा। रिपोर्ट का प्रशासन पर गहरा असर पड़ा और अगले दिन मजदूरों को राशन की आपूर्ति की गई।

  1. रितुपर्णा चटर्जी

एक अनुभवी पत्रकार जिन्‍होनें बताया कि भारत में पीपीई किट मासिक धर्म को ध्यान में रखते हुए डिजाइन नहीं किए गए थे। इस महत्‍वपूर्ण विषय पर प्रकाश डालने के लिए उनकी काफी सराहना की गइ।

  1. फेय डिसूजा

महामारी की रिपोर्टिंग से लेकर सरकार के हर मुद्दों पर फेय डिसूजा ने अपनी आवश्यक पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व किया। पूरे 2020 में, उन्‍होनें सोशल मीडिया पर अपने अनुयायियों को महत्वपूर्ण तथ्यों और समाचारों से अपडेट रखा।

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