गांव-गांव जाकर पारंपरिक बीजों को जुटाया जाएगा
सागर। देश में कई फसलें विलुप्त होती जा रही हैं। इसके संरक्षण के लिए बीज बैंक (seed bank) की शुरुआत की गई है। अब मप्र के सागर में पुरातन और विलुप्त हो रहे बीजों के संरक्षण के लिए पहली बार बीज बैंक (seed bank) बनाने की पहल शुरू की गई है। इसके संचालन के लिए महिलाओं को ‘बी सखी’ के रूप में चुना जाएगा। चयन के बाद उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और वे गांव-गांव जाकर पारंपरिक बीजों को एकत्रित करेंगी।
बढ़ते उत्पादन की दौड़ के दुष्परिणाम
अधिक उत्पादन की होड़ में पारंपरिक बीज धीरे-धीरे गायब होते गए। हाइब्रिड बीजों से पैदावार तो बढ़ी, लेकिन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग ने स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ा दीं। देशी बीजों की उपेक्षा से जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ है।
Read Also- : किसानों के लिए खुशखबरी- मधुमक्खी पालन पर ये सरकार दे रही 40% तक सब्सिडी
कलेक्टर का विशेष अभियान
इन हालात को देखते हुए कलेक्टर संदीप जीआर ने जिले में बीज बैंक स्थापना का अभियान शुरू किया है। उद्देश्य है कि पुराने, उपयोगी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बीजों को फिर से संरक्षित और प्रचलित किया जाए। योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में कम से कम दो बी सखियों का चयन किया जाएगा। ये महिलाएं बीजों के संग्रह, संरक्षण, संवर्धन और उत्पादन बढ़ाने के तरीके सीखेंगी और आगे गांवों में काम करेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा बीज सखी प्रशिक्षण का आयोजन 17 और 18 फरवरी को किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण आजीविका भवन खुरई में होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शामिल होंगी। वे बी सखी के रूप में अपनी पहचान बनाएंगी और आगे बीज संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगी।

गांव-गांव से जुटाएंगी बीज
प्रशिक्षण के बाद बी सखियां गांव-गांव जाकर पारंपरिक और विलुप्तप्राय बीजों को एकत्रित करेंगी। इसके साथ ही वे इन बीजों के दोबारा उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू करेंगी। बी सखियां बुजुर्ग और अनुभवी किसानों से मिलकर बीजों का इतिहास, उपयोग और उनकी खासियतों की जानकारी भी जुटाएंगी। इससे पारंपरिक खेती की समझ को फिर से मजबूत किया जाएगा।
बनेगा बायोडायवर्सिटी रजिस्टर
संकलित जानकारी को दस्तावेजी रूप दिया जाएगा। इसके आधार पर बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार होगा, जो भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बनेगा। इस पहल से नई पीढ़ी को देशी बीजों की विरासत से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को स्थानीय, टिकाऊ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।
Read Also- इस आइडिया को अपनाएं किसान भाई, सब्जियों से होगा डबल मुनाफा
क्या है बीज बैंक (Seed Bank)
बीज बैंक (Seed Bank) या जीन बैंक एक ऐसा सुरक्षित स्थान है जहाँ विभिन्न पौधों की प्रजातियों, विशेषकर लुप्तप्राय और कृषि के लिए महत्वपूर्ण बीजों को भविष्य के लिए संरक्षित किया जाता है। यहाँ बीजों को बहुत कम तापमान और नियंत्रित आर्द्रता (Dry conditions) में रखा जाता है ताकि उनकी अंकुरण क्षमता बनी रहे। इसका उद्देश्य जैव विविधता (Biodiversity) की रक्षा करना, बीमारियों से बचाव, और आपदा के समय फसलों को पुनर्जीवित करना है।
बीज बैंक की मुख्य विशेषताएं और कार्य
- संरक्षण विधि: बीजों को कम नमी और लगभग -20 डिग्री सेल्सियस तापमान (शीत भंडारण) पर रखा जाता है, जिससे उनकी चयापचय गतिविधि धीमी हो जाती है।
- उद्देश्य: जलवायु परिवर्तन, कीट, रोग, या आपदाओं के कारण जैव विविधता के नुकसान को रोकना।
- प्रकार: ये स्थानीय समुदायों के लिए ‘सहायतावादी’ (छोटे स्तर) से लेकर ‘संरक्षणवादी’ (विश्व स्तर के बैंक, जैसे स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट) तक हो सकते हैं।
- महत्व: यह वैज्ञानिक अनुसंधान, दुर्लभ प्रजातियों को बचाने, और कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सामुदायिक बीज बैंक: ग्रामीण स्तर पर किसान आपस में मिलकर बीज बैंक बनाते हैं, जहाँ देशी बीजों का भंडारण किया जाता है और खेती के लिए कम मूल्य पर बीज लिए जा सकते हैं।

