नासिक में आयोजित एग्रीकल्चर फेस्टिवल 2026 के दौरान नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) ने किसानों और बाजार के बीच मजबूत जुड़ाव बनाने के लिए सरकार की अहम पहलों को सामने रखा। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना और पारदर्शी व प्रभावी खरीद व्यवस्था को बढ़ावा देना रहा।
फेस्टिवल में बताया गया कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS), ई-समयुक्ति पोर्टल और NCCF के ‘जनाह’ ब्रांड के जरिए सरकारी खरीद प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है। इन पहलों का मकसद किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, बिचौलियों की भूमिका कम करना और सुनिश्चित खरीद तक उनकी पहुंच आसान बनाना है।
अधिकारियों के अनुसार, ये सभी प्रयास इस बात को दर्शाते हैं कि सरकार सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खरीद और मार्केटिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सहकारी ब्रांड के सहारे NCCF किसानों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने, कीमतों में स्थिरता लाने और उनका भरोसा मजबूत करने का काम कर रहा है। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक नंबर पर सारी जानकारी

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक खास हेल्पलाइन शुरू की है, जिससे अब किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कृषि विभाग की सभी योजनाओं की जानकारी अब सिर्फ एक फोन कॉल पर उपलब्ध होगी।
इस हेल्पलाइन का उद्घाटन कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में किया। प्रदेश भर के किसान 0522-2317003 नंबर पर सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कॉल कर सकते हैं।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस हेल्पलाइन का उद्देश्य किसानों को योजनाओं की पूरी जानकारी उनके मोबाइल फोन पर ही उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें भटकना न पड़े। एक कॉल के जरिए किसान सब्सिडी, सरकारी योजनाएं, सोलर पंप, कृषि सेवाएं, डिजिटल एग्रीकल्चर सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं।
इसके अलावा, हेल्पलाइन पर कृषि मशीनरी, बीज, खाद, कीटनाशक, फसल उत्पादन, नई तकनीक, शोध और नवाचारों से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी। खास तौर पर, बटन नंबर 5 दबाने पर किसान सीधे कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में दो बड़ी पहल: बनारस से नई दिशा
बनारस में शिक्षा और कृषि—दोनों क्षेत्रों में अहम पहल देखने को मिली। एक ओर बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) की महिला कल्याण संगठन ने शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, वहीं दूसरी ओर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।
BLW महिला कल्याण संगठन ने चेतना प्रशिक्षण केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को बाल विकास की बेहतर समझ देना था। यह कार्यक्रम 16 से 22 जनवरी तक चला। प्रशिक्षण पूरा करने वाले शिक्षकों को प्रमाण पत्र दिए गए, जिन्हें संगठन की अध्यक्ष मोनिका श्रीवास्तव ने प्रदान किया। साथ ही, प्रशिक्षकों को भी सराहना पत्र दिए गए और शिक्षकों व स्टाफ को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई गई।
जलवायु परिवर्तन से निपटने पर अंतरराष्ट्रीय मंथन

इसी बीच, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का जेनेटिक्स और प्लांट ब्रीडिंग विभाग, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है।
यह सम्मेलन “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि: सतत विकास, नवाचार और समाधान” विषय पर 5 से 7 फरवरी तक आयोजित होगा।
इस सम्मेलन में दुनिया भर से 500 से अधिक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे, जो जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य टिकाऊ और जलवायु-सहिष्णु खेती को बढ़ावा देना है।
चाहे नासिक का एग्रीकल्चर फेस्टिवल हो, उत्तर प्रदेश की किसान हेल्पलाइन हो या बनारस में शिक्षा और कृषि से जुड़ी पहल—ये सभी प्रयास एक ही दिशा में इशारा करते हैं। सरकार और संस्थाएं मिलकर किसानों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को सशक्त बनाने की कोशिश कर रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सहकारी मॉडल, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए खेती को ज्यादा लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा रहा है। यह साफ है कि इन पहलों से न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था भी मजबूत होगी।

