देश में कृषि अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया Agriculture Infrastructure Fund (AIF) अब जमीनी स्तर पर बड़ा बदलाव ला रहा है। ₹1 लाख करोड़ के इस फंड के जरिए देशभर में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिट्स का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे फसल नुकसान में 5% से 15% तक कमी आई है और किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है। राज्यसभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार सत्ता सुख के लिए नहीं, बल्कि किसान, गांव और गरीब के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि “जीवनदाता” है।
44 हजार से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर, हजारों वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज स्थापित
कृषि मंत्री ने बताया कि AIF के तहत अब तक—
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44,243 कस्टम हायरिंग सेंटर
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25,854 प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर
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25,565 फार्म हार्वेस्ट ऑटोमेशन यूनिट
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17,779 वेयरहाउस
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4,201 सॉर्टिंग व ग्रेडिंग यूनिट
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3,549 स्मार्ट व प्रिसिजन एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर
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2,827 कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जा चुके हैं। इन आधुनिक सुविधाओं से फसल, फल और सब्जियों के भंडारण में सुधार हुआ है, जिससे पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस में उल्लेखनीय कमी आई है।
पंजाब से तमिलनाडु तक समान विकास
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा। पंजाब में AIF के तहत 32,014 आवेदन प्राप्त हुए और ₹7,425.98 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹11,351.54 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। इन परियोजनाओं से न केवल स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ी है, बल्कि प्रत्येक परियोजना से 4 से 9 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। तमिलनाडु के संदर्भ में उन्होंने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पूरे देश में समान रूप से लागू है, जिसमें बेहतर बीज, क्लस्टर आधारित उत्पादन, डेमो प्लॉट और प्रति हेक्टेयर ₹10,000 तक सहायता जैसे प्रावधान शामिल हैं।
MSP पर 50% लाभ का दावा
एमएसपी के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार उत्पादन लागत पर 50% लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया है। उन्होंने दावा किया कि किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। दलहन खरीद के संदर्भ में उन्होंने बताया कि जहां UPA सरकार के 10 वर्षों में केवल 6 लाख मीट्रिक टन दलहन खरीदा गया, वहीं वर्तमान सरकार ने 1 करोड़ 92 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद की है। तुअर, मसूर और उड़द की 100% खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए NAFED और NCCF को अधिकृत किया गया है। भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजा जा रहा है।
‘दलहन क्रांति’ और 2030 तक आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि 2016 तक भारत दालों का सबसे बड़ा आयातक था, लेकिन तकनीकी सुधार, उन्नत बीज और नीति समर्थन से 2021-22 में 27.30 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। लक्ष्य है कि 2030-31 तक भारत दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए।
पराली प्रबंधन: समाधान की दिशा में कदम
पराली को लेकर मंत्री ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। सरकार ने Crop Residue Management (CRM) योजना के तहत— किसानों को मशीनों पर 50% सब्सिडी और FPO व संस्थाओं को कस्टम हायरिंग सेंटर हेतु 80% सब्सिडी प्रदान की है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित राज्यों में 3.5 लाख से अधिक मशीनें वितरित की जा चुकी हैं।
फसल विविधीकरण और जल संरक्षण पर जोर
सरकार अब चावल-गेहूं के साथ-साथ दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा दे रही है। कम पानी में तैयार होने वाली किस्मों और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
₹1 लाख करोड़ के AIF, MSP में 50% लाभ, 100% दलहन खरीद, फसल विविधीकरण और पराली प्रबंधन जैसी पहलों के जरिए केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में व्यापक कदम उठा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करना, फसल नुकसान कम करना और भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
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