आज के डिजिटल दौर में कॉमेडी सिर्फ हंसने का जरिया नहीं बल्कि एक अटेंशन गेम बन चुका है। इसी दौर में शेखर सुमन अपने पुराने अंदाज में एक नए शो के साथ वापस आ चुके हैं।
जी हां, शेखर सुमन अपने यूट्यूब ऑफिशल चैनल पर Shekhar Tonite शो से वापसी कर चुके हैं। इन्होंने कॉमेडी को फिर से पुराना रंग दे दिया है। बिना गाली, बिना डार्क जोक्स और बिना पर्सनल कटाक्ष किए एक स्टैंड अप को शेखर सुमन बखूबी से निभा रहे हैं और उनके इस शो ने सोशल मीडिया पर लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या बिना अश्लीलता के भी कॉमेडी हिट हो सकती है?
आज के दौर में सबसे बड़ा सवाल यह है कि समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे नाम के बीच क्या साफ सुथरी समझदार कॉमेडी अपनी जगह बना सकती है? और यही बदलाव लेकर आए हैं शेखर सुमन अपने नए शो Shekhar Tonite के साथ!
शेखर सुमन की कॉमेडी शो में सादगी लेकिन गहराई!
शेखर सुमन के Shekhar Tonite कॉमेडी शो की सबसे बड़ी खासियत ही यह है कि इसमें कोई कोई अश्लीलता नहीं देखी जा रही। ना ही इसमें सस्ती लोकप्रियता के चलते किसी अनचाहे मुद्दे को उठाया गया है। यह शो समाज के ज्वलंत मुद्दों पर चोट कर रहा है। इस शो की पंच लाइन सिर्फ हंसी नहीं लाती बल्कि एक संदेश भी देती है।
इस शो में बिना गाली गलौज के आने वाले मेहमानों से सही तरीके से बात की जा रही है। पंच लाइन दर्शकों को हंसाने के लिए काफी है, वही सोचने पर मजबूर भी करती है। मतलब यह पुराने दौर की उस कॉमेडी को रिप्रेजेंट करता हुआ शो है जहां शब्दों का चयन, टाइमिंग और भावनाओं की समझ सबसे अहम होती थी।
आज के कॉमेडियन और क्लासिक स्टाइल में अंतर
आज के दौर में समय रैना, रणबीर अल्लाहबादिया जैसे अनेकों नाम है जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। डार्क ह्यूमर, इंटरनेट कल्चर और रोमांच के चक्कर में यह Gen Z को पसंद तो बहुत आ रहे हैं, लेकिन इन लोगों के कॉमेडी शो में कॉमेडी कम और अभद्रता अश्लीलता बहुत ज्यादा होती है। कई बार यह लोग अपने कंटेंट में सीमाएं पार कर जाते हैं। कुछ ऐसे कमेंट या बयान दे जाते हैं जो मामले को और असहज बना देते हैं। इन नए कॉमेडियंस ने मनोरंजन और असहजता के बीच की रेखा को काफी धुंधला बना दिया है।
फूहड़ता बनाम फाइननेस की बहस
शेखर सुमन का यह शो आज एक ऐसे समय में आया है जहां कॉमेडी में शॉक वैल्यू हथियार बन चुकी है। गाली गलौज, डबल मीनिंग जोक्स, निजी हमले चुटकियों में हंसाते देते हैं, लेकिन लंबे समय तक प्रभाव नहीं छोड़ते। इसके उलट शेखर सुमन का यह शो साबित करता है कि बिना फूहड़ता के भी दर्शकों को बांधा जा सकता है। उनकी यह कॉमेडी काफी सभ्य और मर्यादित है। इसीलिए शायद पहले एपिसोड से ही शेखर सुमन सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।
क्या यह शो बदल देगा ऑडियंस की पसंद
सोशल मीडिया पर जिस तरह शेखर सुमन ट्रेंड कर रहे हैं उससे साफ है कि दर्शक अब हंसी नहीं बल्कि कंटेंट में क्वालिटी भी तलाश रहे हैं। लंबे समय से शेखर सुमन इस पर्दे से दूर रहे, लेकिन अब शेखर सुमन ने दमदार वापसी कर ली है। हंसाने के साथ-साथ वे समाज पर सवाल भी उठाने का साहस रख रहे हैं वह भी बिना किसी सस्ती भाषा और बिना किसी विवाद के.. ऐसे में इतना स्पष्ट है कि शेखर सुमन जल्द ही तेजी से लोकप्रिय हो जाएंगे।
कुल मिलाकर अब लोगों को शायद समझ आ रहा है की कॉमेडी का असली उद्देश्य केवल हंसना नहीं बल्कि सोचने पर मजबूर करना भी है। ऐसे दौर में जहां कॉमेडियंस फूहड़ भाषा और अश्लीलता से तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, वही शेखर सुमन जैसे कलाकार याद दिलाते हैं कि क्लासिक और साफ सुथरी कॉमेडी की अपनईअलग ताकत होती है।
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