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Pithoragarh Case: 14 साल की लड़की बनी मां, नाबालिग पति पर POCSO केस, बाल विवाह की सच्चाई फिर आई सामने

नाबालिग पति पर POCSO केस

Pithoragarh से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर देश में बाल विवाह जैसी गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। यहां एक नाबालिग लड़के पर Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि उसकी 14 साल की पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया।

अस्पताल पहुंचते ही खुला पूरा मामला

जब नाबालिग लड़की डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंची, तब अधिकारियों को इस मामले की जानकारी मिली। डॉक्टरों और प्रशासन को शक हुआ, क्योंकि लड़की की उम्र बेहद कम थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे बाल विवाह की सच्चाई सामने आई।

परिवारों ने करवाई थी शादी, दोनों ही नाबालिग

14 साल की लड़की बनी मां, नाबालिग पति पर POCSO

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़का और लड़की दोनों ही नाबालिग हैं और उनकी शादी परिवारों की सहमति से अनौपचारिक तरीके से करवाई गई थी। भारतीय कानून के अनुसार, नाबालिगों के बीच किसी भी तरह का शारीरिक संबंध अपराध माना जाता है चाहे वे शादीशुदा ही क्यों न हों। इसी आधार पर लड़के के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस और CWC की कड़ी नजर

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि लड़की की सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और अस्पताल में उसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

प्यार, भागकर शादी और फिर पुणे का सफर

बताया जा रहा है कि यह मामला Munsyari इलाके से शुरू हुआ, जहां दोनों किशोर एक-दूसरे को स्कूल के समय से जानते थे। धीरे-धीरे दोनों करीब आए और करीब एक साल पहले मंदिर में चुपचाप शादी कर ली। शादी के बाद दोनों पुणे चले गए, जहां लड़का एक प्राइवेट कंपनी में काम करने लगा। लड़की के पिता भी वहीं सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहे थे।

बाल विवाह: कानून सख्त, लेकिन जमीनी हकीकत अलग

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भारत में बाल विवाह की समस्या अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गरीबी, जागरूकता की कमी और सामाजिक मान्यताओं की वजह से आज भी कई जगह ऐसे मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बच्चों को कई तरह के जोखिम में डाल देती हैं जैसे कम उम्र में प्रेग्नेंसी से स्वास्थ्य खतरे, पढ़ाई छूट जाना और कानूनी पचड़े में फंसना।

चेतावनी भी, सीख भी

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि समाज को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है। बच्चों को शिक्षित करना, परिवारों को जागरूक बनाना और कानून का सख्ती से पालन कराना यही इस समस्या का असली समाधान है। जब तक ये तीनों चीजें साथ में नहीं होंगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे और मासूम जिंदगी पर इसका असर पड़ता रहेगा।

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