Sadabahar Mango : आम का मौसम आने ही वाला है। बाजारों में जल्द ही आमों की खुशबू और मिठास से भर जाएंगे। कोटा के किसान किशन सुमन द्वारा विकसित ‘सदाबहार आम’ एक अनोखी किस्म है, जो साल में तीन बार फल देती है। इसका स्वाद अल्फोंसो आम जैसा ही है और इसमें किसानों की आय को काफी हद तक बढ़ाने की क्षमता है। इनके इस इनोवेशन से प्रभावित होकर आनंद महिंद्रा ने किसान को अपना समर्थन देने की इच्छा जताई है। उन्हें अब आनंद महिंद्रा से समर्थन मिल रहा है।
किसान किशन सुमन की कहानी
कोटा के पास एक छोटे से गाँव के रहने वाले किशन सुमन शुरू में गेहूँ और चावल की खेती करते थे। उनके मन में हमेशा अपनी खेती के तरीकों में कुछ नया करने की इच्छा रहती थी। उनकी पहली बड़ी उपलब्धि गुलाब की एक अनोखी किस्म उगाना थी, जिसमें सात अलग-अलग रंगों के फूल खिलते थे। इसके बाद, उन्होंने आम की ग्राफ्टिंग (कलम लगाने) की तकनीक में महारत हासिल करना शुरू कर दिया।
सदाबहार आम की खोज
सुमन ने एक ही, असाधारण आम के पेड़ पर प्रयोग करते हुए एक दशक से भी ज़्यादा समय बिताया। उनका मकसद आम की एक ऐसी किस्म विकसित करना था जो साल में तीन बार फल दे सके। इस अथक मेहनत का नतीजा आम की एक नई किस्म के रूप में सामने आया’सदाबहार आम’। यह आम अल्फोंसो जितना ही स्वादिष्ट है, इसमें फाइबर कम होता है, और इसने वैज्ञानिक समुदाय को भी प्रभावित किया है। इसके पौधे अब धीरे-धीरे राष्ट्रपति भवन तक पहुँच रहे हैं।

आनंद महिंद्रा का समर्थन
हाल ही में, आनंद महिंद्रा ने X (पहले Twitter) पर इस आम के बारे में लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर यह किस्म बड़े पैमाने पर सफल साबित होती है, तो यह किसानों की आय, सप्लाई चेन और आम के पूरे अनुभव में क्रांति ला सकती है। उन्होंने आगे कहा कि जहाँ हम अक्सर इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्टार्टअप्स की तलाश करते हैं, वहीं असली उद्यमिता अक्सर किसानों के खेतों में ही मिल जाती है। उनके अनुसार, सुमन का यह प्रयास धैर्य, वैज्ञानिक सोच और प्रकृति के साथ तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण है। अंत में, आनंद महिंद्रा ने लिखा कि अगर सुमन इस प्रोजेक्ट को बड़े पैमाने पर बढ़ाना चाहते हैं, तो वे उनके साथ खड़े हैं। यह किसानों के लिए प्रेरणा और नेतृत्व का एक सच्चा उदाहरण है।
राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान
‘सदाबहार’ (हमेशा रहने वाली) आम की इस किस्म के लिए, सुमन को NIF (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन) से 9वां राष्ट्रीय ग्रासरूट इनोवेशन और पारंपरिक ज्ञान पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उन्हें कई अन्य मंचों पर भी सम्मानित किया गया है। NIF किसानों, सरकारी विभागों और NGOs के अपने नेटवर्क के ज़रिए आम की इस किस्म के बारे में जानकारी फैलाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
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आम का इतिहास और महत्व क्या है?
‘Mango’ शब्द ‘Manga’ से बना है, जो खुद पुर्तगाली शब्द ‘Manga’ से आया है। माना जाता है कि 15वीं सदी के दौरान, पुर्तगालियों ने भारत में फलों और सब्जियों की ब्रीडिंग की तकनीकें शुरू की थीं।
‘सदाबहार’ आम की विशेषताओं को NIF ने विधिवत प्रमाणित किया है। इसके अलावा, आम की इस किस्म के क्षेत्रीय परीक्षण बेंगलुरु में ICAR–इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चरल रिसर्च (IIHR) और राजस्थान के जोबनेर में SKN कृषि विश्वविद्यालय में किए गए।
किसानों के लिए अवसर
‘सदाबहार’ आम न केवल किसानों की आय बढ़ाने का अवसर देता है, बल्कि आम को साल भर उपलब्ध रहने वाला फल बनाने के सपने को भी साकार करता है। अगर बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाए, तो इसमें पूरे देश में आम की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों के जीवन स्तर को काफी हद तक बेहतर बनाने की क्षमता है। ‘सदाबहार’ आम की कहानी कड़ी मेहनत, लगन और इनोवेशन का प्रतीक है।
किशन सुमन जैसे किसान नई तकनीकों को अपनाकर और प्रयोग करके कृषि में क्रांति ला रहे हैं। आनंद महिंद्रा जैसे उद्योगपतियों का समर्थन इस दिशा में और भी बड़ी संभावनाएं खोलता है। यह इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि विज्ञान, उद्यमिता और किसान समुदाय के बीच तालमेल कैसे समाज और अर्थव्यवस्था, दोनों को मज़बूत कर सकता है।

















