राज़ी रीमेक: ‘धुरंधर 2’ की अपार सफलता के बाद बॉलीवुड में राष्ट्रवादी फिल्मों की चर्चा तेज हो चुकी है। इसी क्रम में ‘राज़ी’ फिल्म भी सुर्खियों में आ चुकी है। बॉलीवुड की ‘राज़ी’ फिल्म जिस किताब पर आधारित है उसके लेखक हरिंदर सिक्का ने अब खुलकर निर्देशिका मेघना गुलजार पर निशाना साधा है। धुरंधर 2 में जिस प्रकार राष्ट्रवाद दिखाया गया है वैसा राष्ट्रवाद कॉलिंग सहमत किताब में भी है, लेकिन मेघना गुलजार ने कहानी को बदल दिया।
लेखक का दावा है जिस देशभक्ति की भावना को किताब में पेश किया गया है पर्दे पर उस भावना को बेहद ही अलग तरीके से पेश किया गया। जिसकी वजह से हरिंदर सिक्का ने मेघना गुलजार को अपनी ‘कॉलिंग सहमत’ पर फिल्म बनाने के लिए चुनना अपनी सबसे बड़ी गलती बताई है। बॉलीवुड की गलियारों में खबर तेज हो चुकी है कि ‘राज़ी 2’ या ‘राज़ी रीमेक’ जल्द ही बनाई जाने वाली है और इसमें इस बार मुख्य भूमिका आलिया भट्ट नहीं बल्कि यामी गौतम निभाएंगी।
‘राज़ी रीमेक’ को लेकर क्या है असली मामला?
कॉलिंग सहमत हरिंदर सिक्का द्वारा लिखी गई एक ऐसी किताब है जो सेहमत नाम की एक जासूस की जिंदगी पर आधारित है। जिसका किरदार राज़ी फिल्म में आलिया भट्ट ने निभाया था। हरिंदर सिक्का ने सहमत की असली जिंदगी और पाकिस्तान जाने की कहानी पर किताब लिखी थी।
इसमें देश भक्ति, पड़ोसी देश द्वारा किए जाने वाले अत्याचार इत्यादि का जिक्र है। लेकिन मेघना गुलज़ार ने निर्देशन के दौरान इन सभी को बदल दिया। कहानी के मूल संदेश में ही बदलाव कर दिया। हालांकि राज़ी को क्रिटिक्स और दर्शकों की काफी सराहना मिली। लेकिन कहानी के लेखक हरिंदर सिक्का फिल्म से संतुष्ट नहीं हुए।
फिल्म और कहानी में क्या अंतर है?
फिल्म ‘राज़ी’ और किताब ‘कॉलिंग सहमत’ के बीच सबसे बड़ा अंतर है नॉरेटिव का। किताब में देशभक्ति की भावना दिखाई गई है। जासूसी मिशन को राष्ट्रहित दिखाया गया है। वही मेघना गुलजार ने इस फिल्म को भावनात्मक नजरिए से पेश किया है। आलिया भट्ट द्वारा निभाए गए किरदार सहमत को एक संवेदनशील लड़की के रूप में दिखाया गया है। किताब वाली सहमत दृढ़ और मिशन फोकस्ड हैं, जबकि फिल्म वाली सहमत में इंसानी कमजोरी दिखाई गई है। फिल्म में ऑपरेशन की रणनीति को कम कर दिया गया है। वही लेखक ने किताब में असली जासूसी ऑपरेशन को काफी गंभीरता से लिखा है।

लेखक के हिसाब से मेघना गुलजार ने क्या अलग कर दिया है?
मेघना गुलजार में अपने सॉफ्ट और इमोशनल स्टोरी टेलिंग के जरिए इस किताब का नैरेटिवही बदल दिया है। ‘राज़ी’ को एक जासूसी थ्रिलर की बजाय इमोशनल ड्रामा के रूप में पेश कर दिया। उन्होंने दुश्मन देश को नकारात्मक नहीं दिखाया, युद्ध और जासूसी की क्रूरता के बीच इंसानियत दिखाने की कोशिश की। जबकि किताब में राष्ट्रवादी एंगल, देश भक्ति ,स्पाई थ्रिलर, एक्शन थ्रिलर सब कुछ भर भर कर मौजूद था पर मेघना गुलजार ने दर्शकों तक गलत संदेश पहुंचाया।
क्या ‘राज़ी’ फिल्म में सचमुच कोई कमी थी?
अगर एक दर्शक के नजरिए से देखें तो राज़ी एक शानदार फिल्म थी। कहानी, अभिनय, निर्देशन काफी बेहतरीन था। लेकिन किताब से जब फिल्म की तुलना की जाए तो नैरेटिव को बदल दिया गया था। फिल्म में कई क्रिएटिव बदलाव किए गए जिसकी असल में जरूरत नहीं थी। लेखक की मूल सोच से हटकर निर्देशक ने अलग करने की कोशिश की। जिसकी वजह से लेखक की भावना पर्दे पर नहीं उतरी। वही सहमत का किरदार परिपक्व और राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत था पर फिल्म में आलिया भट्ट को काफी इमोशनल और कमजोर दिखाया गया।
क्या ‘राज़ी रीमेक’ बनने वाली है?
‘राज़ी रीमेक’ को लेकर फिलहाल बॉलीवुड में चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। यहां तक के लोग इस बार यामी गौतम को सहमत के रूप में कास्ट करने की मांग कर रहे हैं। धुरंधर 2 के सुपरहिट होने के बाद अब लोग इन विषयों पर फिल्में बना देखना चाहते हैं। इसीलिए यामी गौतम का नाम नई सहमत के रूप में लिया जा रहा है। हालांकि अभी तक ‘राज़ी 2’ या ‘राज़ी रीमेक’ पर कोई पुख्ता खबर नहीं आ रही, लेकिन कहा जा रहा है कि आने वाले समय में शायद आदित्य धर हरिंदर सिक्का के साथ मिलकर ‘राज़ी रीमेक’ बनाने वाले हैं।
कुल मिलाकर ‘कॉलिंग सहमत’ के लेखक राज़ी फिल्म से बिल्कुल खुश नहीं। लोग भी अब असली राष्ट्रवाद और असली कहानी जानना चाहते हैं। लोग ‘राज़ी’ का नया वर्जन देखना चाहते हैं। ऐसे में खबरें आ रही है कि हरिंदर सिक्का आदित्य धर को अब अपनी स्पाई थ्रिलर कहानी सौंपने वाले हैं जिसका नया वर्जन जल्द ही बनाया जाएगा। और यदि यह फिल्म बनी तो ‘यामी गौतम’ को इसमें ‘सहमत’ के रूप में कास्ट किया जाएगा। हालांकि जब तक यह ऑफिशल अनाउंसमेंट नहीं बनती तब तक इसे बॉलीवुड बज ही समझा जाए।

















