Godhuli Bela: मान्यताओं के अनुसार, शाम के समय (गोधूलि बेला में) घर के मुख्य दरवाज़े पर दीया जलाना घर में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने का एक अहम तरीका है। शाम का यह समय जिसे प्रदोष काल भी कहते हैं। घर में शुभ और सकारात्मक तरंगें लाने के लिए बहुत पवित्र माना जाता है।
इस समय मुख्य दरवाज़े पर दीया जलाना देवी लक्ष्मी को घर में आने और जीवन में समृद्धि लाने का न्योता देने जैसा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दीया नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर के अंदर सकारात्मक माहौल बनाए रखता है। गोधूलि बेला में यह रस्म निभाना बहुत ज़्यादा अहम माना जाता है।
देवी लक्ष्मी को न्योता
पद्म पुराण में कहा गया है कि मुख्य दरवाज़े पर दीया जलाना देवी लक्ष्मी को घर में पधारने का प्यार भरा न्योता देने जैसा है। यह तरीका घर में धन-दौलत और समृद्धि के आने का रास्ता खोलता है। दीये की रोशनी अज्ञानता के अंधेरे को भी दूर करती है और जीवन में खुशहाली लाती है।

नकारात्मक ऊर्जा का खात्मा
वास्तु शास्त्र में मुख्य दरवाज़े को घर का चेहरा माना जाता है। जिस तरह हमारे अपने चेहरे की चमक ज़रूरी है, उसी तरह दरवाज़े पर रोशनी का होना भी उतना ही ज़रूरी है। शाम के समय जब दिन और रात मिलते हैं तो अक्सर नकारात्मक ऊर्जाएं घर में घुसने की कोशिश करती हैं। दीया जलाने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं। साथ ही घर के अंदर सकारात्मक माहौल बना रहता है।
यम और पूर्वजों का आशीर्वाद
कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह तरीका भगवान यम (मृत्यु के देवता) से भी जुड़ा है। माना जाता है कि शाम के समय दरवाज़े की चौखट पर दीया जलाने से अकाल मृत्यु का डर दूर होता है। इसके अलावा, पुराणों के अनुसार, यह प्रकाश हमारे पूर्वजों (पितरों) के लिए एक मार्गदर्शक दीपक का काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका आशीर्वाद परिवार पर हमेशा बना रहे।
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वास्तु दोषों से मुक्ति
मुख्य द्वार वह मुख्य माध्यम है जिससे होकर ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। दिन और रात के मिलन के संक्रमण काल में नकारात्मक ऊर्जाएँ सक्रिय हो जाती हैं। एक दीपक (तेल का दीया) जलाने से इन शक्तियों को दूर भगाने में मदद मिलती है, जिससे घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित होता है।
दीपक जलाने की सही विधि
- दीपक को हमेशा मुख्य द्वार के दाईं ओर रखें (जब आप घर से बाहर की ओर देख रहे हों)।
- सरसों के तेल या शुद्ध घी (मक्खन) से जलाया गया दीपक सबसे शुभ माना जाता है।
- सूर्यास्त के तुरंत बाद या गोधूलि बेला के समय दीपक जलाना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

















