शेयर बाजार रिस्क: स्टॉक में पैसा लगाने वालों के लिए बहुत ही बुरी खबर सामने आ रही है। दुनिया की दिग्गज इन्वेस्टमेंट कंपनी Goldman Sachs ने भारत के बाजारों के लिए खतरे का सिग्नल दे दिया है। जिस भारतीय बाजार को अब तक सबसे मजबूत और तेजी वाला बताया जा रहा था वह अब भारी गिरावट झेलने वाला है।
जी हां, भारतीय बाजारों से बड़े-बड़े निवेशक पैसा निकालने लगे हैं। कंपनियों की कमाई गिरने लगी है और तेल की बढ़ती कीमतों में बाजार को हिला कर रख दिया है। जिसके चलते अब हर निवेशक के दिमाग में सवाल घूम रहा है कि आने वाला समय कैसा होगा? क्या निवेश करना चाहिए या सावधान हो जाना चाहिए? शेयर बाजार रिस्क को ध्यान में रखते हुए गोल्डमैन सैक ने चेतावनी जारी की है ताकि हर निवेशक सावधान हो सके और मेहनत की कमाई को नुकसान से बचाया जा सके।
शेयर बाजार रिस्क को लेकर Goldman Sachs ने क्या कहा है?
स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट और शेयर बाजार रिस्क को लेकर Goldman Sachs ने भारतीय शेयर बाजार को ओवरवेट से घटाकर मार्केट वेट कर दिया है। मतलब अब यह वह बाजार है जिस पर निवेशक ज्यादा भरोसा नहीं दिखा रहे। nifty का टारगेट कम हो चुका है। कंपनियों की अर्निंग काफी कम हो चुकी है। आने वाले समय में शायद कमाई और भी कम हो जाएगी। 2024 में कंपनियों की कुल ग्रोथ 8% तक गिर चुकी है। जहां पिछले वर्ष तक यह ग्रोथ 16% पर थी इस वर्ष या 8% पर आकर अटक गई है। ऐसे में निवेशकों का भरोसा भारतीय कंपनियों से हट रहा है।

शेयर बाजार पर मंडराया तेल, युद्ध और महंगाई का संकट
- Goldman Sachs के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार रिस्क का सबसे बड़ा कारण तेल का आयात है।
- कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- क्योंकि भारत पूरी तरह से तेल के आयात पर निर्भर है। इसी वजह से आने वाले समय में महंगाई बढ़ेगी, कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, मुनाफा घटेगा।
- ईरान और इजराइल में युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है जिसकी वजह से निवेशकों का भरोसा भी कमजोर हो रहा है।
- वहीं विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते अब बड़े खिलाड़ी सावधान हो चुके हैं।
- बता दें 2026 में 1 लाख करोड़ से ज्यादा विदेशी निवेशक पैसा निकाल चुके हैं। केवल मार्च में ही 88 हजार करोड़ भारतीय बाजार से निकाले जा चुके हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा असर
Goldman Sachs की माने तो भारतीय GDP भी अनुमानित रूप से कम हो चुकी है। पहले जीडीपी 7% पर थी जो अब 5.9% पर आ गई हैं। समय के साथ महंगाई बढ़ने का खतरा, रुपए में और गिरावट और ब्याज दर बढ़ सकती है। मतलब निवेशक इस मूड में नहीं है कि वह भारत के बाजारों में पैसा लगाएं। हालांकि हो सकता है कि यह शेयर बाजार रिस्क आने वाले 3 से 6 महीना के लिए रहे, लेकिन शेयर में गिरावट की वजह से निवेशकों पर असर जरूर पड़ेगाम
ऐसी स्थिति में निवेशकों को क्या करना चाहिए ?
- जानकारों के अनुसार शेयर बाजार रिस्क से बचने के लिए निवेशकों को बाजार में जल्द ही गिरावट का मुंह दिखने वाला है ऐसे में ब्लाइंड इन्वेस्टमेंट करना बंद कर दें।
- डिफेंसिव स्टॉक पर ध्यान दें, एक्सपर्ट्स के अनुसार बैंकिंग, FMCG, डिफेंस, ऊर्जा जैसे स्टॉक अभी भी सुरक्षित हैं।
- शॉर्ट टर्म में प्रॉफिट का लालच ना करें, पैसा कमाने की जल्दी भारी नुकसान दे सकती है।
- SIP वाले SIP जारी रखें, पैनिक सेलिंग न करें।
- गिरावट में मौके का इंतजार करें और गिरावट में भी सुरक्षित निवेश करने की कोशिश करें।
Goldman Sachs की इस प्रकार की भविष्यवाणी से दुनिया भर के निवेशक सावधान हो चुके हैं। हालांकि इस भविष्यवाणी से भारत के निवेशकों में अफ़रा-तफरी मच चुकी है। वहीं विदेशी निवेशक भी पहले से ज्यादा सावधान हो चुके हैं। लेकिन यह केवल सावधान करने के लिए दी जाने वाली चेतावनी है क्योंकि बाजार अभी खत्म नहीं हुआ है और मौके अब और भी आएंगे।
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