भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम (MP Mausam) के दो अलग-अलग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ़, पूर्वी ज़िलों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश हो रही है; वहीं दूसरी तरफ़, पश्चिमी और मध्य इलाकों में तेज़ धूप और गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। कई शहरों में तापमान 38°C के पार चला गया है। 27 और 28 मार्च के लिए आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम के इन पैटर्न में बदलाव की वजह एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ़ लाइन का एक्टिव होना है।
क्यों बन रहे दो अलग-अलग मौसम पैटर्न ?
मौसम के हालात में यह बदलाव एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ़ लाइन के एक्टिव होने का नतीजा है। नतीजतन, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग असर देखने को मिल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह स्थिति एक-दो दिन और बनी रहने की संभावना है।
27-28 मार्च को फिर बदलेगा मौसम
मौसम विभाग ने 27 और 28 मार्च के लिए आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि 26 मार्च से उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) एक्टिव हो रहा है; इसका असर ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभागों में महसूस किया जाएगा। इसके बाद, 28 मार्च को एक और मौसम सिस्टम के एक्टिव होने की उम्मीद है, जिससे मौसम के हालात और बिगड़ सकते हैं।

कुछ इलाकों में बारिश, तो दूसरों में झुलसाने वाली गर्मी
कल, रीवा और सागर में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि मालवा-निमाड़ इलाके में तेज़ गर्मी पड़ी। खंडवा और रतलाम में तापमान 38°C के आसपास रहा। नर्मदापुरम, खरगोन और रायसेन जैसे ज़िलों में भी पारा 37°C से ऊपर चला गया।
बड़े शहरों में, उज्जैन सबसे ज़्यादा गर्म रहा, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी गर्मी का असर साफ़ तौर पर देखा गया।
चार दिनों में 45 ज़िलों में बारिश, ओलावृष्टि की भी खबरें
खबर है कि पिछले चार दिनों से सक्रिय और मज़बूत मौसम प्रणाली के कारण, कुल 45 ज़िलों में तूफ़ान और बारिश का दौर चला। इनमें से 17 ज़िलों में ओलावृष्टि भी हुई। इन ज़ोरदार तूफ़ानों ने केले, पपीते और गेहूँ जैसी फ़सलों को काफ़ी नुकसान पहुँचाया है। इसके चलते किसान अब मुआवज़े की माँग कर रहे हैं। धार और खरगोन समेत कई ज़िलों को इस मार का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ा।
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फ़रवरी में चार बार और मार्च में तीन बार हुई ओलावृष्टि
इस साल, फ़रवरी में मौसम का मिज़ाज चार बार बदला। महीने की शुरुआत में, राज्य में ओलावृष्टि, बारिश और तेज़ हवाओं के दो अलग-अलग दौर चले। इससे फ़सलों को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद, सरकार ने प्रभावित फ़सलों को हुए नुकसान का जायज़ा लेने के लिए एक सर्वे करवाया। 18 फ़रवरी से राज्य में बारिश का तीसरा दौर शुरू हुआ। इसका असर 19, 20 और 21 फ़रवरी तक बना रहा। इसके बाद, 23-24 फ़रवरी को ओलावृष्टि और बारिश का चौथा दौर आया।
मार्च के पहले पखवाड़े में पड़ी ज़बरदस्त गर्मी
मार्च के पहले पखवाड़े में ज़बरदस्त गर्मी पड़ी। हालाँकि, अब मौसम का मिज़ाज बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, इस मौसम में पहली बार मार्च में एक मज़बूत मौसम प्रणाली सक्रिय हुई, जिसका असर चार दिनों तक बना रहा। इसके चलते लगातार तीन दिनों तक ओलावृष्टि हुई। उम्मीद है कि 26 मार्च से एक नई मौसम प्रणाली सक्रिय होगी। इसके अलावा, ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि 29 मार्च को एक और नई प्रणाली सक्रिय होगी।
मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज़्यादा गर्मी पड़ेगी। इन दो महीनों के दौरान, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के ज़िलों में तापमान 45 डिग्री के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभागों में भी गर्म मौसम रहने की उम्मीद है।

















