हैदराबाद: 28–29 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र ICRISAT में दो दिवसीय आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें National IP Yatra 2026 और Udyam Pradarshan 2026 शामिल थे। यह राष्ट्रीय पहल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के समर्थन से आयोजित की गई। आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें MSMEs, स्टार्टअप्स, आईपी विशेषज्ञ और मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी मौजूद थे। Intellectual Property Management (IPR) को Make-in-India और Start-up India जैसी प्रमुख पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह कार्यक्रम नवाचारों को बढ़ावा देने और Viksit Bharat 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप आयोजित किया गया।
गवर्नर ऑफ तेलंगाना ने किया उद्घाटन

इस अवसर पर माननीय गवर्नर, तेलंगाना, श्री जिष्णु देव वर्मा ने उद्घाटन समारोह में शिरकत की। उन्होंने ICRISAT की नवीनतम उपलब्धियां पेश की, जिसमें शामिल हैं:
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दुनिया की पहली Heat-Tolerant Pigeonpea (ICPV 25444)
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दुनिया का पहला Drought-Tolerant Three-Way Pearl Millet Hybrid (RHB-273) साथ ही उन्होंने ICRISAT के Biochar Systems Research and Innovation Hub का भी उद्घाटन किया।
ICRISAT की भूमिका और समर्थन
डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने स्वागत भाषण में IP विशेषज्ञों, प्रदर्शकों और प्रतिभागियों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि ICRISAT स्टार्टअप्स और MSMEs को IPR समर्थन, क्षमता निर्माण और इनक्यूबेशन सेवाओं के माध्यम से लगातार सहयोग प्रदान करता है।
डॉ. हिमांशु पाठक, निदेशक जनरल, ICRISAT ने कहा: “आज की तेजी से बदलती दुनिया में, IP जागरूकता पूरे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकता है। MSMEs, स्टार्टअप्स, महिला और युवा नवप्रवर्तनकर्ताओं, ग्रामीण उद्यमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं तक यह जागरूकता फैलाना जरूरी है।”
माननीय गवर्नर ने भी ICRISAT की वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान और विज्ञान, ज्ञान तथा विकास को जोड़ने की क्षमता की सराहना की। “National IP Yatra MSMEs को पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और अन्य IPR के महत्व को समझने में सक्षम बनाता है, जिससे वे वैश्विक बाजार में आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
तकनीकी सत्रों में चर्चा National IP Yatra 2026 में पाँच तकनीकी सत्र आयोजित हुए:

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Plant Variety Rights
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भारत में अगले दशक की IP सुधार नीतियां
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Geographical Indications (GI) का परिदृश्य
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Digital और AI नवाचार
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लाइसेंसिंग और मूल्यांकन जैसे व्यावसायिक पहलू
सत्रों में ICRISAT के डॉ. सूर्य मणि त्रिपाठी और डॉ. दिनेश चौहान सहित NABARD, NALSAR, AICTE, IIT खड़गपुर, IIT पटना, NI-MSME और STEM के विशेषज्ञों ने भाग लिया। तेलंगाना के नवाचार संस्थान IKP, ALEAP, BITS पिलानी, TAFE, Advanta, IP Excel, Anand & Anand और Sriram Bioseed ने भी योगदान दिया। विशेष रूप से Padma Shri डॉ. राजनीकांत, जो 20 राज्यों में 59 से अधिक GI टैग सुनिश्चित कर चुके हैं, ने भारतीय GIs के वैश्विक विस्तार पर जोर दिया।
Udyam Pradarshan 2026 में 23 नवाचारों का प्रदर्शन
Udyam Pradarshan 2026 में 250+ तकनीकी प्रस्तुतियों में से 23 नवाचारों का चयन किया गया। यह प्रदर्शन कृषि, डिजिटल तकनीक, AI, IoT, बायोटेक, जीवन विज्ञान, जलवायु-समझ, खाद्य प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुआ। साथ ही 12 Geographical Indications (GI) का भी प्रदर्शन किया गया, जो कृषि, खाद्य और कला एवं हस्तशिल्प को कवर करते हैं।
समापन सत्र और भविष्य की राह
विशेष मुख्य सचिव, तेलंगाना, श्री जयेश रंजन ने वर्चुअली संबोधन देते हुए कहा: “तेलंगाना नवाचार के लिए उपयुक्त मंच है। ICRISAT जैसे संस्थानों के नेतृत्व में ऐसे प्लेटफ़ॉर्म नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करते हैं। जब ज्ञान सुरक्षित और साझा किया जाता है, तो यह विकास के लिए एक शक्ति बन जाता है।” उन्होंने ICRISAT के शोध को वैश्विक सार्वजनिक भलाई में बदलने की क्षमता की सराहना की, जैसे कि जलवायु-सहिष्णु फसलें, तकनीकी हस्तांतरण और उद्यमिता को बढ़ावा देना।












