Mahavir Jayanti हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस साल 4 अप्रैल के दिन यह पर्व है, जिसे जैन धर्म अपने 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म दिवस के उपलक्ष में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाने वाला है।
महावीर जयंती से जुड़ी कुछ बातें-
Mahavir Jayanti एक त्योहार है, जो भगवान महावीर के जन्मदिन के अवसर पर पूरे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। हर साल महावीर जयंती भारत में मार्च या अप्रैल के महीने में आती है।

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Mahavir Jayanti मुख्य रूप से उन लोगों का त्योहार है जो जैन धर्म को मानने वाले हैं। लेकिन यह त्योहार केवल एक धर्म तक ही सीमित नहीं है क्योंकि विभिन्न अन्य परंपराओं के लोग भी इसको धूमधाम से मनाते है और इस पर्व के आयोजन में भाग लेते हैं।
आपको बता दें कि जिस दिन भारत में Mahavir Jayanti मनाई जाती है, उस दिन भगवान महावीर की मूर्तियों वाले रथों के साथ जुलूस निकाले जाते हैं, जिसे शोभायात्रा कहा जाता है।
वैसे तो यह त्योहार पूरे भारत में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन गुजरात और राजस्थान में Mahavir Jayanti पर होने वाले समारोह सभी के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
इस दिन क्या किया जाता है-

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हम आपको बता दें कि कुछ प्रथागत परंपराएं हैं जिनका पालन हर साल महावीर जयंती के दिन किया जाना चाहिए। जिसमें महावीर की मूर्ति को अपने घरों में लाना और उसका अनुष्ठान करना शामिल है।
इस दिन परेडें निकाली जाती हैं उनमें ज्यादातर महावीर के जीवन और कार्यों का चित्रण होता है। परेड के दौरान गाने और भजन गाए जाते हैं और जैन धर्म के गुणों का प्रचार-प्रसार किया जाता है।
Mahavir Jayanti का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए दान है जो जरूरतमंदों की सेवा करना है।
यह भी उन सिद्धांतों में से एक है जिसे भगवान महावीर ने सभी को सिखाया है और आज के समय में जैन धर्म के लोग इसे बरकरार रखे हुए हैं। यह दान है ज्ञान दान (ज्ञान फैलाना), अभय दान (धन), औषधि दान (दवाएं) और आहार दान (भोजन) के रूप में हो सकता है।
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महावीर जयंती 2023 शुभ मुहूर्त
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 03 अप्रैल 2023 को सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर हो चुकी है। ये तिथि अगले दिन 04 अप्रैल को सुबह 08 बजकर 05 मिनट पर समाप्त होगी। आपको बता दे कि उदय तिथि 04 अप्रैल को प्राप्त हो रही है, इसलिए 04 अप्रैल को ही महावीर जयंती मनाई जाएगी।

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महावीर स्वामी के जन्म से जुड़ी बातें
महावीर स्वामी का जन्म बिहार के कुंडाग्राम में हुआ था और उन्हें बचपन में वर्धमान कहा जाता था। स्वामी महावीर 30 वर्ष की उम्र में अपना राजपाट छोड़ सत्य की खोज में जंगलों की ओर चले गए और 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की।
इसके बाद उन्हें ऋजुबालुका नदी के तट पर कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। उन्होंने समाज के सुधार और लोगों के कल्याण के लिए उपदेश दिए थे।
जाने महावीर स्वामी के विचार-
Mahavir Jayanti: भगवान महावीर कहते है कि अपने आप पर विजय प्राप्त करो। क्योंकि यह एक चीज लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है। हर आत्मा अपने आप में आनंदमय और सर्वज्ञ है।
आनंद हमारे अंदर ही है तो आप इसे बाहर ढूंढने की कोशिश न करें। हर एक जीवित प्राणी के ऊपर दया करो। घृणा केवल विनाश का कारण बनती है। ईश्वर का कोई अलग अस्तित्व नहीं है। बस सही दिशा में अपना पूरा प्रयास करके आप देवताओं को पा सकते हैं।
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